गरीबी को मात देकर PM मोदी के मंच तक का सफर, हापुड़ की दिलकश जहां की कहानी बनी लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा
हापुड़ की दिलकश जहां ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गरीबी को मात दी और हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी का सफल कारोबार शुरू किया।

दिलकश के हुनर ने दिलाई नई पहचान। जागरण
HighLights
दिलकश जहां ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गरीबी दूर की।
हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हुईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का मंच संचालन किया।
जागरण संवाददाता, हापुड़। कभी गरीबी से बाहर निकलने और परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग करने की चिंता में रहने वाली जिले के गांव सलाई की 28 वर्षीय दिलकश जहां आज अपने हुनर के दम पर नई पहचान बना चुकी हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद न केवल उनकी जिंदगी बदली, बल्कि समाज में सम्मान भी मिला।
अब वह हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी तैयार कर उसे विभिन्न मेलों में बेचने के साथ समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं।
समूह में शामिल हैं 11 महिलाएं
एमए और एलएलबी शिक्षित दिलकश जहां खुशी स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह में 11 महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह विद्यार्थी थीं और भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहती थीं।
मन में अक्सर यह सवाल रहता था कि गरीबी से कैसे बाहर निकलें और परिवार की आर्थिक स्थिति में किस तरह सहयोग करें। इसी दौरान गांव में ब्लॉक मिशन प्रबंधक मनीष कुमार व वीरेंद्र कुमार तथा आईसीआरपी दीदियों ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।
इसके बाद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद दिलकश के जीवन में बदलाव आने लगा। वह नियमित रूप से समूह, ग्राम संगठन और सीएलएफ की बैठकों में शामिल होने लगीं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और अन्य महिलाओं के साथ मिलकर समस्याओं का सामना करने की क्षमता विकसित हुई।
एक लाख रुपये लेकर शुरू किया कारोबार
दिलकश ने स्वयं सहायता समूह से एक लाख रुपये लेकर हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी का काम शुरू किया। समूह की सभी 11 सदस्य मिलकर आभूषण तैयार करती हैं।
दिलकश जिले के साथ ही दूसरे प्रदेशों में आयोजित सरस मेलों में भी प्रतिभाग करती हैं और समूह द्वारा तैयार उत्पादों का स्टाल लगाकर बिक्री करती हैं।
इससे समूह को प्रतिवर्ष करीब तीन से चार लाख रुपये की आमदनी हो रही है। वहीं उनके परिवार की वार्षिक आय भी करीब चार से पांच लाख रुपये तक पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री के मंच का किया संचालन
दिलकश जहां के लिए सबसे बड़ा अवसर 11 मार्च 2024 को आया, जब उन्हें दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में मंच संचालन करने का अवसर मिला।
उनका कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री के मंच का संचालन करने का मौका मिलेगा।
उनका मानना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती मिली, बल्कि देशभर में पहचान और सम्मान भी मिला। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मिशन के अधिकारियों और प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया।
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