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‘मुर्गा, शराब या खीर-पूरी खिलाओ...’, दावत की रखी अनोखी शर्त; फिर रिश्वत लेते रंगे हाथों अधिकारी गिरफ्तार

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:25 PM (IST)

हापुड़ में परिवार रजिस्टर की नकल के लिए रिश्वत मांगने वाले ग्राम विकास अधिकारी सुशील कुमार को एंटी करप्शन टीम ने 5,000 रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

HighLights

  1. ग्राम विकास अधिकारी सुशील कुमार हापुड़ में गिरफ्तार।

  2. परिवार रजिस्टर नकल के लिए मांगी थी रिश्वत।

  3. पहले दावत फिर 5000 रुपये नकद की मांग।

जागरण संवाददाता, हापुड़। परिवार रजिस्टर की नकल चाहिए तो पहले दावत देनी पड़ेगी... दावत में क्या खिलाओगे, शराब, मुर्गा या खौर-पूड़ी? ग्राम विकास अधिकारी की रिश्वत मांगने का तरीका भी निराला था।

पहले दावत के नाम पर शराब, मुर्गा और पूड़ी की मांग की, लेकिन बाद में खाने-पीने का सामान लेने के बजाय पांच हजार रुपये नकद देने का फरमान सुना दिया। आखिरकार रिश्वत की इस मांग ने ग्राम विकास अधिकारी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को हापुड़ ब्लाक कार्यालय में पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते ग्राम विकास अधिकारी सुशील कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

17 अक्टूबर को हुई सुशील कुमार से मिला पीड़ित

पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में एंटी करप्शन टीम के प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद ने बताया कि हापुड़ के थाना कपूरपुर थाना क्षेत्र के गांव सालेहपुर कोटला के सलमान को परिवार रजिस्टर की नकल की आवश्यकता थी। इसके लिए वह 17 अक्टूबर को मोदीनगर रोड स्थित ब्लाक कार्यालय पहुंचा और ग्राम विकास अधिकारी सुशील कुमार से मिला।

आरोप है कि नकल देने के बदले ग्राम विकास अधिकारी ने उससे दावत की मांग कर दी। शिकायतकर्ता ने पूछा कि दावत में क्या चाहिए तो आरोपित ने शराब, मुर्गा और खौर-पूड़ी की बात कही। इसके बाद कई बार फोन पर भी दावत की मांग दोहराई गई।

29 अक्टूबर को आरोपित ने सलमान को पड़ोस के गांव डहाना बुलाया। वहां बातचीत के दौरान उसने दावत के लिए पांच हजार रुपये नकद देने को कहा। सलमान ने तीन नवंबर को रुपये देने का समय ले लिया, लेकिन रिश्वत देने के बजाय उसने भ्रष्टाचार निवारण संगठन मेरठ से शिकायत कर दी।

गोपनीय जांच में हुई पुष्टि

शिकायत की गोपनीय जांच में प्रथम दृष्टया रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर निरीक्षक कैलाश चंद्र के नेतृत्व में ट्रैप टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने पांच हजार रुपये के दस नोटों पर फिनाफ्थलीन पाउडर लगाकर शिकायतकर्ता को दिए। जिलाधिकारी कार्यालय से बीडीओ विजय कुमार और कलेक्ट्रेट की प्रधान सहायक अमिता मिश्रा को स्वतंत्र गवाह बनाया गया।

योजनाबद्ध तरीके से सलमान ब्लॉक कार्यालय पहुंचा। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ने पहले परिवार रजिस्टर की नकल तैयार कराकर उस पर मुहर और हस्ताक्षर किए। इसके बाद दावत के पांच हजार रुपये मांगे। सलमान ने जैसे ही केमिकल लगे नोट उसे दिए, उसने रकम अपनी पैंट की पिछली जेब में रख ली।

दोपहर करीब साढ़े बजे टीम ने उसे कक्ष संख्या छह में दबोच लिया। तलाशी में आरोपित की जेब से पांच हजार रुपये बरामद हुए। नोटों के नंबरों का मिलान करने पर वह ट्रैप टीम द्वारा दिए गए नोट ही निकले। टीम ने आरोपित के हाथ धुलवाए तो घोल गुलाबी हो गया।

रिश्वत की रकम, परिवार रजिस्टर की नकल, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य कब्जे में लेकर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।

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