चिकन-अंडा खाने वाले हो जाएं सावधान, हापुड़ में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा यूरिया; फेल हो सकती है किडनी
हापुड़ में मुर्गी दाने में यूरिया मिलाकर मुर्गों का वजन तेजी से बढ़ाया जा रहा है, जिससे चिकन खाने वालों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
मुर्गा फार्म हाउस में प्रयोग किया जा रहा है यूरिया से बनाया विषाक्त दाना।
मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़ मंडलों के साथ ही हरियाणा में भी सप्लाई।
यूरिया के अमोनिया से बनने वाला प्रोटीन हार्ट-किडनी को पहुंचाता है नुकसान।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। चिकन-अंडा खाने वालों के लिए चिंता की खबर है। पोल्ट्री फार्म में प्रयोग किए जाने वाले मुर्गी दाने में यूरिया प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मुर्गों का शरीर व वजन तेजी से बढ़ता है और वह जल्द ही बिक्री के लायक हो जाते हैं।
इससे पोल्ट्री फार्म संचालकों काे तो लाभ होता है, लेकिन मुर्गा-चिकन खाने वालों के हार्ट व किडनी पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गो के शरीर में यूरिया की मौजूदगी रहती है, जिससे मुर्गा खाने वालों की मौत तक हो सकती है।
मुर्गा-दाना में प्रयोग हो रहा यूरिया
अधिकारियों ने शुक्रवार व शनिवार को बुलंदशहर रोड व रामपुर रोड के पास मुर्गी दाना बनाने के लिए पिसाई के लिए लाए गए करीब 400 कट्टे यूरिया बरामद किया है। यह कृषि कार्य में प्रयुक्त होने के लिए लाया गया यूरिया था, जिस पर सरकारी सब्सीडी दी जाती है।
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मुर्गा फार्म में जांच में सामने आया कि इस यूरिया को मुर्गीदाना तैयार करने में मिलाया जा रहा था। इस दाने की कई राज्यों में बड़ी मांग है। इसका प्रयोग करने से मुर्गा का शरीर व वजन तेजी से बढ़ते हैं, जिससे पोल्ट्री फार्म संचालकों को अच्छा मुनाफा होता है।
यूरिया के प्रयोग से दो नुकसान
इस यूरिया के प्रयोग से दोहरा नुकसान हो रहा है। एक ओर जहां सरकार को राजस्व का नुकसान है, वहीं इससे तैयार होने वाला मुर्गीदाना विषाक्त हो जाता है। मुर्गीदाना बनाने के लिए यूरिया का पहुंचना सामान्य नहीं है। यूरिया के एक-एक बोरे की निगरानी की जाती है।
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कृषि विभाग के अधिकारी लगातार दुकानों के स्टाक रजिस्टर, बिक्री व गोदाम की जांच करते हैं। जानकारों का कहना है कि मिलीभगत के बिना यूरिया की अवैध बिक्री संभव ही नहीं है।
मुर्गीदाना में यूरिया मिलाने का नहीं है प्रावधान
पशु पोषाहार विज्ञान के एक्सपर्ट व पशु शोध संस्थान कानपुर के प्रोफेसर रहे डा. एसपी त्यागी का विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गीदाना में यूरिया मिलाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसको अवैध रूप से मिलाया जा रहा है। इससे तैयार होने वाले दाने का प्रयाेग करने से मुर्गाें का शरीर तेजी से बढ़ता है।

जिससे उनका वजन ज्यादा हो जाता है और पोल्ट्री संचालकों को ज्यादा लाभ होता है। इस दाने के साथ ही यूरिया मुर्गों के शरीर में पहुंच जाता है। यूरिया से मुर्गों के शरीर में अमोनिया बनती है, जो प्रोटीन में बदल जाती है। इस प्रोटीन के कारण ही मुर्गों का शरीर फूलता है।
लोगों के शरीर में पहुंच जाता है यूरिया
यूरिया मिलाकर तैयार किए गए दाने को खाने से मुर्गो का शरीर भी विषाक्त हो जाता है। जब इसका प्रयोग लोेगों द्वारा किया जाता है तो यूरिया से तैयार प्रोटीन उनके शरीर में पहुंच जाती है। इससे लोगों का रक्तचाप बढ़ने के साथ ही हृदय व किडनी प्रभावित होने लगते हैं। ऐसे में वह गंभीर बीमारियों की चपेट में आने के साथ ही मौत के शिकार भी हो सकते हैं।
मानव सेहत के लिए यूरिया और उससे तैयार खाद्य पदार्थ बेहद घातक हैं। नियमानुसार पोल्ट्री फार्म व मुर्गादाना फार्म में जांच की जानी चाहिए। मुर्गो की सेहत की भी जांच होनी चाहिए। यूरिया मिश्रित दाने के प्रयोग से मुर्गा बड़ा जरूर होता है, लेकिन वह बीमार होता है, जिसका प्रभाव मुर्गा खाने वालों पर पड़ना तय है।
- डॉ. प्रदीप मित्तल, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
मुर्गा दाना तैयार करने में यूरिया का प्रयोग बेहद घातक है। हमको सूचना मिलती है तो दाने का सैंपल तत्काल लिया जाएगा। अब हम मामले की जांच कर रहे हैं। मुर्गा दाना की जांच के बाद हमारी ओर से भी अभियोग दर्ज कराया जाएगा। यूरिया से तैयार होने वाली प्रोटीन में अमोनिया होता है, जिससे वह मानव प्रयोग के लिए बेहद घातक है।
- डॉ. ओपी मिश्रा, मुख्य पशुधन अधिकारी।
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