विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हापुड़ में नोटिस और ट्रांसफर के बाद भी ARP परीक्षा में शामिल हुआ शिक्षक, उठे बेसिक शिक्षा विभाग पर सवाल

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:12 PM (GMT+05:30)

हापुड़ में एक शिक्षक को लंबित जांच और विभागीय कार्रवाई के बावजूद एआरपी चयन प्रक्रिया में शामिल करने पर शिकायत ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

HighLights

  1. शिक्षक को लंबित जांच के बावजूद एआरपी चयन में शामिल किया।

  2. विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर भी प्रक्रिया में रहा।

  3. जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

जागरण संवाददाता, हापुड़। एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) चयन प्रक्रिया में एक शिक्षक को शामिल किए जाने को लेकर शिकायत जिलाधिकारी से की गई है।

शिकायतकर्ता दिल्ली के गुरुदयाल सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी धौलाना, निपुण सेल के अधिकारियों और वरिष्ठ लिपिक पर नियमों की अनदेखी करते हुए शिक्षक को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।

जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में गुरूदयाल सिंह ने बताया गया कि एआरपी चयन के लिए जारी विज्ञप्ति और शासनादेश में ऐसे शिक्षक को ही पात्र माना गया है, जिसके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित न हो और जिसे पूर्व में किसी कार्रवाई में दोषी न पाया गया हो।

22 जुलाई थी आवेदन की अंतिम तिथि

आवेदन की अंतिम तिथि 22 जुलाई निर्धारित थी। इसके बावजूद प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर की मढ़िया, धौलाना में तैनात प्रधानाध्यापक का आवेदन सत्यापित कर चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया।

आरोप है कि प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुसूचित जाति आयोग, दिल्ली में कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न और जातिगत द्वेष सहित अन्य शिकायतों से संबंधित जांच चल रही है। इसके संबंध में आयोग की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।

इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने 21 अगस्त को जारी पत्र के माध्यम से शिक्षक को एआरपी परीक्षा में शामिल कर लिया। इसके बाद 31 अगस्त को हुई एआरपी चयन परीक्षा में भी उसके शामिल होने की बात कही गई है।

अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

इसकी जानकारी चयन समिति के अध्यक्ष को भी दी गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और शिक्षक का नाम साक्षात्कार के लिए भेज दिया गया।

आरोप है कि एक अन्य मामले में शिक्षक के खिलाफ विभागीय जांच हुई थी। जांच में उन्हें सरकारी सेवक नियमावली, 1956 के तहत दोषी पाया गया और 27 अगस्त को प्रशासनिक स्थानांतरण करते हुए उनका विद्यालय कंपोजिट विद्यालय न्याजपुर खय्या, ब्लाक सिंभावली कर दिया गया।

इसके बावजूद उसे पुराने विद्यालय से कार्यमुक्त नहीं किया गया और एआरपी चयन प्रक्रिया में शामिल रखा गया। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अभिलेखों की जांच करने और नियमों के विपरीत चयन प्रक्रिया में शामिल किए गए अभ्यर्थी को प्रक्रिया से अलग करने की मांग की है। एडीएम संदीप सिंह ने बताया कि शिकायती पत्र की जांच होगी।

यह भी पढ़ें- यूपी के परिषदीय स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया सख्त, कक्षा 1 में दाखिले के लिए जन्मतिथि के साथ शपथपत्र जरूरी