हापुड़ में स्मार्ट सिटी के दावे खोखले, नागरिक झेल रहे लचर व्यवस्था की मार
हापुड़ में स्मार्ट सिटी के दावों के बावजूद नागरिक खराब व्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। टूटे बिजली के खंभे, जलभराव ...और पढ़ें

हापुड़ में स्मार्ट सिटी के दावे खोखले (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
हापुड़ में टूटे बिजली के खंभे, बड़े हादसे का खतरा।
सड़कों पर जलभराव, आवागमन बाधित, लोग हो रहे घायल।
30% आबादी को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल, पाइपलाइन टूटी।
जागरण संवाददाता, हापुड़। शहर को स्मार्ट बनाने के दावे और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के वादे, दोनों ही जमीनी हकीकत के आगे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
कहीं हादसे को दावत देता लटका विद्युत पोल लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है, तो कहीं दो-दो जिम्मेदार विभागों के बोर्ड लगे होने के बावजूद रास्ते पर जलभराव नागरिकों की राह रोक रहा है।
सवाल यह है कि जब जिम्मेदारों के नाम और विभागों की पहचान तक सार्वजनिक है, तब समस्याओं का समाधान आखिर कौन करेगा? करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बीच बदहाल व्यवस्थाएं सरकारी कार्यप्रणाली की पोल खोल रही हैं।
लचर व्यवस्था से जूझ रहे लोग
हालात ऐसे हैं कि नागरिकों को सुविधाएं मिलने के बजाय हर दिन लचर व्यवस्था से जूझना पड़ रहा है और जिम्मेदार मानो किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठे हैं।
पड़ाव से उबारपुर-हाफिजपुर मार्ग से रोजाना हजारों पैदल और वाहन सवारों का आवागमन होता है। इस मार्ग पर एक पूर्व व एक वर्तमान जनप्रतिनिधि का सड़क निर्माण का बोर्ड भी लगा है। उसके बावजूद रास्ता पैदल निकलने लायक भी नहीं है। यहां पर रोजाना दर्जनों बाइकसवार गिरकर घायल होते हैं।
इस मार्ग से होकर पांच गांवों के लोगों को शहर आना पड़ता है। उसके बावजूद कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। जबकि स्थानीय लोगों द्वारा दर्जनों बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है।
सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
यह शहर की पंजाबी कॉलोनी का हाल है। नगर पालिका को सबसे ज्यादा टैक्स देने वाली इस कॉलोनी के लोगों पर बिजली बिल का कोई बकाया नहीं है। उसके बावजूद सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है।
विद्युत पोल को देखकर लगता है कि पावर स्टेशन इसको ही बनाया गया है। उस पर भी स्थिति यह है कि पोल बीच से टूटा हुआ है। कॉलोनी में नौ विद्युत पोल जर्जर हैं और झुके हुए हैं। इनमें से दो तो टूटे हुए हैं। किसी दिन इनके गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। उसके बावजूद जिम्मेदार सुध लेने को तैयार नहीं है।
शहर के 30 प्रतिशत लोगों को शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं है। यहां के 20 प्रतिशत लोगों को निजी सप्लाई वाले केन-वाटर जग को लेना पड़ रहा है। पालिका के पास शहर को जरूरत के हिसाब से देने के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं हैं।
उसके बावजूद जिम्मेदार गंभीर पेयजल की सुचारू व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं। यहां पर ग्रीन वैली के सामने एक सप्ताह से पाइप लाइन टूटी पड़ी है। ऐसे में पानी लगातार नाले में बह रहा है। तीन दिन में हजारों लीटर पानी नाले में बहकर नष्ट हो गया है। उसके बावजूद जिम्मेदार सुध लेने को तैयार नहीं हैं।
मूलभूत सुविधाओं को प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। कोई भी विभाग इसमें लापरवाही नहीं कर सकता है। उक्त मामलों को दिखवाया जा रहा है। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसको नोटिस जारी करके निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।- संदीप कुमार- अपर जिलाधिकारीयह भी पढ़ें- दीपावली से पहले रायबरेली में लगेंगी नई स्ट्रीट लाइटें, जगमग होगा शहर, जरूरत वाले स्थानों की मांगी गई सूची
