हापुड़ में जानलेवा गड्ढे: खराब सड़कों से बढ़ रहे हादसे, जिम्मेदार मौन
हापुड़ में खराब सड़कों और गहरे गड्ढों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं, जिनमें हर साल 50 से ...और पढ़ें

हापुड़ में जानलेवा गड्ढे: खराब सड़कों से बढ़ रहे हादसे ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
हापुड़ में खराब सड़कों और गड्ढों से बढ़ रहे सड़क हादसे।
प्रतिवर्ष 100 से अधिक दुर्घटनाएं, 50 से ज्यादा मौतें दर्ज।
बुलंदशहर बाईपास भी उद्घाटन से पहले ही क्षतिग्रस्त, गहरे गड्ढे।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। जिले में गड्ढ़े बन जाते हैं। इससे नई सड़क बनाने पर लगने वाले लाखों के बजट का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इसके साथ ही गड्ढ़ों को ठीक कराने पर मोटी धनराशि खर्च की जाती है।
वह भी भरने के साथ ही उखड़ने लगते हैं। हर साल गड्ढ़ों को भरने और उखड़ने का खेल चलता रहता है। ऐसे में ठेकेदार और संबंधित विभाग के अधिकारी जहां मालामाल होते जाते हैं, वहीं लोगों को गड्ढ़ाें से होकर ही चलना पड़ता है।
सड़कों की बदहाल स्थिति पर अब कोई चर्चा नहीं...
स्थिति यह है कि सड़कों के बनते ही उखड़ने और गड्ढ़े बनने की अब जिम्मेदार चर्चा तक नहीं करते हैं। कार्रवाई तो दूर की बात है। जिले में गड्ढों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। उसके बावजूद जिम्मेदार जांच के बहाने मामले से कन्नी काट रहे हैं।
मामला सड़कों को बनाने का हो या गड्ढों को भरने का। इसमें जिम्मेदार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं। गुणवत्ता से ज्यादा ध्यान कमिशन पर रहता है। वहीं निर्माण का कार्य जिम्मेदार इंजीनियर्स द्वारा ठेकेदार पर ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों पर छोड़ दिया जाता है। उनको सड़क निर्माण का तकनीक ज्ञान नहीं होता है।
सड़कों पर बन चुके हैं गड्ढे
ऐसे में एक्सपर्ट का इंजीनियरिंग का लाभ सड़क निर्माण में नहीं मिल पाता है। जिले में सात सड़क बनने के साथ ही उखड़कर बिखर गई हैं। उनमें गहरे और जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढ़ों में गिरकर दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा घायल होते हैं।
लापरवाही और मनमानी का सबसे बड़ा उदाहरण बुलंदशहर बाईपास मार्ग का है। इसका निर्माण 50 करोड़ की लागत से कराया गया है। अभी उदघाटन भी नहीं किया गया है। उससे पहले ही सड़क उखड़कर बिखर गई है। इसमें कई फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। इसका दुखद पहलू यह भी है कि गड्ढ़ों की मरम्मत के नाम पर भी सड़कों का लेवल ऊंचा-नीचा कर दिया जाता है। जिससे हादसे और बढ़ जाते हैं।
हर साल गड्ढ़ों के कारण सौ से ज्यादा हादसे होते हैं। आई-रेड के रिकार्ड के अनुसार इनमें हर साल 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। उसके बावजूद सड़क सुरक्षा की बैठकों में गड्ढों को ब्लैक स्पाट नहीं माना जाता है।
हम किसी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं करते हैं, जो सड़क बनने के साथ ही टूटी हैं या गड्ढे बनें हैं, उनकी मरम्मत जिम्मेदार ठेकेदार द्वारा कराई जाएगी। किसी स्थान पर जानलेवा गड्ढे नहीं रहेंगे, इनकी मरम्मत का कार्य आरंभ कर दिया गया है। हमने निगरानी टीम का भी गठन किया है। - शैलेंद्र सिंह- अधिशासी अभियंता- लोक निर्माण विभाग।यह भी पढ़ें- गढ़मुक्तेश्वर में वर्षा से 30 हजार क्विंटल धान भीगा किसानों-व्यापारियों को बड़ा नुकसान
