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हापुड़ में शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, सुख-समृद्धि की कामना

Published: Mon, 12 Oct 2026 11:28 AM (IST)

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन हापुड़ में श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने परिवार की ...और पढ़ें

मंदिर में पूजा अर्चना करती महिला श्रद्धालु ( फोटो स्रोत : जागरण )

मंदिर में पूजा अर्चना करती महिला श्रद्धालु ( फोटो स्रोत : जागरण )

HighLights

  1. हापुड़ में शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।

  2. श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

  3. मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं।

हर्ष अग्रवाल, हापुड़। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से देवी की उपासना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। घरों में भी पूजा-पाठ और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से भक्तिमय वातावरण बना।

भक्तों को मिलती है शक्ति

पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल सुशोभित है। मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां की पूजा अर्चना करने मंदिर पहुंचे। देवी को पुष्प, अक्षत, रोली और फल अर्पित कर आरती की।

कई घरों में व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास रखकर मां की भक्ति में लीन रहेंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवी को शक्कर और मिश्री का भोग भी लगाया जाता है।

आस्था और साधना का संदेश 

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना भक्तों को संयम, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश देती है। नवरात्र का यह दिन आध्यात्मिक साधना के साथ मन की दृढ़ता और सकारात्मकता बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

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