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हापुड़ में 8 बीघे सरकारी जमीन पर बन गया ट्रस्ट, फर्जीवाड़ा भी पकड़ा गया; फिर भी जिम्मेदारों पर FIR नहीं

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:40 PM (IST)

धौलाना के रावली गांव में ऊपरी गंग नहर की पटरी से जुड़ी आठ बीघे सरकारी जमीन के अभिलेखों में फर्जीवाड़ा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

HighLights

  1. धौलाना के रावली गांव में आठ बीघे सरकारी जमीन में फर्जीवाड़ा।

  2. फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर जमीन ग्राम सभा के खाते में दर्ज।

  3. फर्जीवाड़ा करने वाले जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं।

संवाद सहयोगी, धौलाना(हापुड़)। धौलाना तहसील क्षेत्र के गांव रावली में उपरी गंग नहर की पटरी से जुड़ी करीब आठ बीघे सरकारी जमीन के अभिलेखों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद तहसील प्रशासन ने विवादित प्रविष्टियां निरस्त कर जमीन को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश तो दे दिया, लेकिन फर्जी दस्तावेज और प्रविष्टियां तैयार कराने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

उपजिलाधिकारी ने भूमि की प्रविष्टि निरस्त करने और उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने के आदेश तो दे दिए, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोई कार्रवाई नहीं की गई। यानी कागजों में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, प्रविष्टि भी खत्म कर दी गई, लेकिन जिम्मेदार लोग बच कर साफ निकल गए।

1981 में हुआ था कृषि पट्टों का आवंटन

जानकारी के अनुसार वर्ष 1981 में ग्राम रावली में कृषि पट्टों का आवंटन हुआ था। बाद में चकबंदी और राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 232/7 व 232 /9 से संबंधित भूमि की प्रविष्टियों को लेकर विवाद सामने आया। जिस पर वर्तमान में शेखुल हिन्द एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट दर्ज है।

तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के आदेश में पुराने अभिलेखों और वर्तमान खतौनी की प्रविष्टियों में अंतर पाते हुए विवादित प्रविष्टियों को निरस्त करने की कार्रवाई की गई। आदेश में भूमि को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने तथा मौके से कब्जा हटाकर ग्राम सभा के कब्जे में दिलाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

जिम्मेदारी तय करने से बच रहा प्रशासन

लेकिन मौके पर शिक्षण संस्थान का निर्माण होने की स्थिति में अब भी बड़ा सवाल यही है कि जिस फर्जीवाड़े के कारण सरकारी भूमि निजी संस्था के नाम तक पहुंच गई, उसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सबसे गंभीर है कि प्रशासन ने जमीन तो वापस सरकारी खाते में दर्ज कर दी, लेकिन फर्जीवाड़े की आपराधिक जांच और जिम्मेदारी तय करने से बच रहा है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी ऋषि राव ने दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई का आश्वाशन दिया है।

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