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मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बिफरे मौलाना अरशद मदनी, कहा-यह सिर्फ धर्मस्थल का मामला नहीं, प्रश्न संवैधानिक अधिकारों का है

By Praveen Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sat, 05 Sep 2026 07:21 PM (GMT+05:30)

मौलाना अरशद मदनी ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे केवल ...और पढ़ें

मौलाना अरशद मदनी।

मौलाना अरशद मदनी।

HighLights

  1. मौलाना मदनी ने मस्जिद ध्वस्तीकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

  2. इसे संवैधानिक अधिकारों व धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताया।

संवाद सहयोगी, देवबंद (सहारनपुर)। सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने पर दारुल उलूम देवबंद के मुख्य उस्ताद एवं जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक मस्जिद से जुड़ा नहीं है, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक समानता से संबंधित है।

मीडिया को जारी बयान में मौलाना मदनी ने कहा कि इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या संविधान और कानून का संरक्षण सभी नागरिकों और धर्मों के लिए समान रूप से हो रहा है। यदि अतिक्रमण और अवैध कब्जे के आधार पर कार्रवाई की जा रही है तो यही मापदंड हर धर्म और वर्ग पर समान रूप से लागू होना चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत के समक्ष कई ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

कमेटी के अनुसार, इन दस्तावेजों से मस्जिद का अस्तित्व कलक्ट्रेट की वर्तमान इमारत से पहले का होने का दावा किया गया था। इनमें 1911 से संबंधित दस्तावेजों के अलावा नगर पालिका रिकार्ड और पुराने राजस्व अभिलेख शामिल थे, लेकिन इन दस्तावेजों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। मदनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी भूमि, मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय से धार्मिक निर्माण मौजूद हैं।

ऐसे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या प्रशासन उनके खिलाफ इसी तत्परता और सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। यदि कार्रवाई में समानता नहीं है तो किसी एक धार्मिक स्थल के मामले में अपनाया गया अलग रवैया न्याय के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करता है। कानून यदि सभी के लिए समान है तो उसका मापदंड भी प्रत्येक धार्मिक स्थल और नागरिक पर एक जैसा लागू होना चाहिए।