हापुड़ में गैस सिलेंडर संकट गहराया, सुबह से लेकर शाम तक मारामारी; लोग चूल्हों और अंगीठी पर लौटे
हापुड़ में गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत है, जिससे लोग सुबह से शाम तक लंबी कतारों में खड़े रहने को ...और पढ़ें

हापुड़ में गैस की किल्लत से लोग परेशान।
HighLights
हापुड़ में गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत जारी है।
लोग खाना पकाने के लिए चूल्हे, अंगीठी का उपयोग कर रहे।
कोयले और लकड़ी की मांग में 25% की वृद्धि हुई।
जागरण संवाददाता, हापुड़। कई स्थानों पर स्कूलों और होटलों में गैस सिलिंडर को हटाकर चूल्हे पर काम आरंभ कर दिया गया है। वहीं घरों में भी जीवनशैली में बदलाव दिखने लगा है। जिन घरों में गैस सिलिंडर उपलब्ध भी हैं, उनको भी खत्म होने का डर सता रहा है। ऐसे में परिवारों में खाना बनाने की प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है।
महिलाओं ने ज्यादातर काम इंडक्शन-अंगीठी और चूल्हों पर करना आरंभ कर दिया है। उनको भय है कि सिलिंडर जल्दी खत्म न हो जाए। बाजार में अंगीठी और चूल्हों की खरीद भी बढ़ गई है। इनको सड़कों के किनारे सजाकर बेचा जा रहा है। वहीं कोयले की खरीद में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कोयले के दाम भी 15 से 20 रुपये तक महंगे हो गए हैं। मांग के अनुसार कोयले की आपूर्ति कम आने की बात कही जा रहा है। चूल्हों और अंगीठियों में लकड़ी और लकड़ी से बनें कोयलों का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं जिन होटलों-ढाबों पर कामर्शियल सिलिंडर पर काम हो रहा था, उन्होंने भी भट्ठियां जलानी आरंभ कर दी हैं।
इसके साथ ही ज्यादा आग चाहने वाले उत्पाद या तो कम कर दिए गए हैं या फिर उनकी कीमत बढ़ा दी गई हैं। वहीं घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर भी मारीमारी का दौर लगातार जारी है। अधिकारियों द्वारा परेशानी नहीं होने की हकीकत फील्ड में नहीं दिख रही है।
तुम्हारी फ़ाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है।
मगर ये आंकड़ें झूठे हैं, ये दावा किताबी है।।
जिले की स्थिति पर बाखूबी सटीक बैठता है। पूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार एजेंसियों पर सिलिंडर पर्याप्त संख्या में हैं। बुकिंग कराने के साथ ही सिलिंडर की अगले दिन सप्लाई दी जा रही है। इसके उलट उपभोक्ताओं की बेबसी यह है कि सिलिंडर बुक हो ही नहीं रहे हैं। कभी सर्वर डाउन है तो कभी स्टाक उपलब्ध नहीं है।
पांच सौ लोगों में से 50 की ही बुकिंग होती है, उनको ही गैस मिल पा रही है। अन्यों को गैस हाथ नहीं आ रही है। जिम्मेदार चाहे जो दावा करें, एजेंसियों पर लगी लंबी लाइन और मच रही मारामारी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि हालात खराब हैं। लोगों को दिनभर भटकने के बाद भी सिलिंडर हाथ नहीं लग रहा है। इससे परेशानी और बढ़ रही है।
मंगलवार को शहर में तीन एजेंसियों पर लंबी लाइन लगीं रहीं। लोग सिलिंडर लेकर सुबह सात बजे से ही एजेंसियों पर जाकर लाइनाें में लग गई। शहर की एक एजेंसी पर लाइन में महिलाओं के साथ दोपहर में धक्का-मुक्की की गई। वहीं रोजेदार दो युवकों के साथ एजेंसी के कर्मचारियों ने मारपीट की।
एजेंसी संचालक जानबूझकर भी लोगों को परेशान कर रहे हैं। शहर में एक एजेंसी द्वारा सिलिंडर की पर्ची आफिस पर काटी जा रही हैं और सिलिंडर वहां से चार किमी दूर एजेंसी पर दिया जा रहा है। एजेंसी पर दोबारा से पर्ची पर मुलह लगवाने की बात कहकर उनको वापस भेज दिया जाता है। ऐसे में लोग गर्मी में कई-कई चक्कर लगा रहे हैं।
बदल रही जीवनशैली
जिन घरों में सिलिंडर हैं, वह भी संभलकर कार्य कर रहे हैं। लोगों ने घरों में सिलिंडर का प्रयोग कम कर दिया है। ज्यादातर कार्य इंडक्शन, चूल्हे और अंगीठी पर हो रहा है। लोगों ने कोयले की खरीद आरंभ कर दी है। वहीं लकड़ी की खरीदारी भी बढ़ी है। घरों में सब्जी आदि ज्यादा सिलिंडर खर्च वाले सामान चूल्हे व अंगीठी पर अनाए जा रहे हैं। जबकि चपाती गैस पर बनाकर काम चलाया जा रहा है। लोगों को अभी गैस की आफत कम होने की उममीद नजर नहीं आ रही है।
गैस की सप्लाई सुचारू है। अफवाहों पर ध्यान न दें। अपने एजेंसी संचालक या पूर्ति निरीक्षक से संपर्क करके परेशानी बता सकते हैं। केवाइसी कराकर अपना सिलिंडर बुक कराएं और आराम से सप्लाई प्राप्त हो जाएगी। किसी भी झांसे में आने या कालाबाजारी का शिकार होने की जरूरत नहीं है। - डॉ. सीमा बालियान, जिला पूर्ति अधिकारी
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