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पराली कचरा नहीं, खेती का अनमोल संसाधन; हापुड़ में किसानों को मिला प्रशिक्षण

Published: Tue, 06 Oct 2026 02:42 PM (IST)

हापुड़ में किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे खेती के लिए उपयोगी संसाधन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। यह ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. पराली जलाने के बजाय उपयोगी संसाधन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

  2. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, प्रदूषण कम करना, खेती की लागत घटाना।

  3. फसल अवशेषों से जैविक खाद और पशु आहार बनाने की जानकारी।

जागरण संवाददाता, हापुड़। पराली जलाकर मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय किसान इसे खेती के लिए उपयोगी संसाधन बना सकते हैं।

फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल वायु प्रदूषण कम करने में सहायक है, बल्कि इससे मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती की लागत घटाने में भी मदद मिलती है।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

किसानों को इन तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, हापुड़ की ओर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें जिले के 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। 

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को पराली न जलाने, फसल अवशेषों को खेत में मिलाने, कम्पोस्ट व जैविक खाद तैयार करने और आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल की जानकारी दी।

फसल अवशेष नहीं उपयोगी संसाधन

कृषि विज्ञान केंद्र, हस्तिनापुर के प्रभारी अधिकारी डा. नवीन चन्द्र ने किसानों को फसल अवशेषों को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हैप्पी सीडर, सुपर सीडर समेत आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से अवशेष प्रबंधन करने पर जोर दिया।

क्या है फसल अवशेष के फायदे?

कृषि विज्ञान केंद्र, हापुड़ के प्रभारी अधिकारी डा. अरविन्द कुमार ने बताया कि फसल अवशेषों का खेत में वैज्ञानिक प्रबंधन करने से मृदा की उर्वरता, जैविक कार्बन और नमी संरक्षण में सुधार होता है। इससे खेती की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों से पराली जलाने से बचने की अपील की।

कृषि वैज्ञानिक डा. नीलम कुमारी ने फसल अवशेषों को खेत में मिलाने, कम्पोस्ट एवं जैविक खाद बनाने और उनसे उपयोगी कृषि उत्पाद तैयार करने की तकनीकें समझाईं। उन्होंने किसानों को इन विधियों को सामूहिक रूप से अपनाने और दूसरे किसानों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।

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पशुओं के लिए तैयार हो सकता है आहार

पशु विज्ञान वैज्ञानिक डा. पीके मडके ने फसल अवशेषों को पशु आहार के रूप में उपयोग करने और भूसे की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उचित उपचार से धान और गेहूं के अवशेषों को पशुओं के लिए अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है, जिससे पशुपालन की लागत घटाने में मदद मिलती है।

मृदा विज्ञान विशेषज्ञ डा. अशोक सिंह ने फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि इससे मृदा में जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ नमी संरक्षण में भी मदद मिलती है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

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