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₹500 प्रति क्विंटल गन्ने का भाव और महंगे बीज पर संग्राम, हापुड़ में क्यों कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों किसान

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:15 PM (IST)

हापुड़ में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान ...और पढ़ें

गन्ना किसानों का प्रदर्शन। जागरण

गन्ना किसानों का प्रदर्शन। जागरण

HighLights

  1. गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग।

  2. बेमौसम बारिश से हुए फसल नुकसान पर मुआवजे की अपील।

  3. आलू बीज के दाम घटाने और खाद उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर।

जागरण संवाददाता, हापुड़। गन्ने की बढ़ती लागत और फसलों को हुए नुकसान के बीच किसानों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर के नेतृत्व में आयोजित पंचायत में किसानों ने आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। पंचायत की अध्यक्षता ओमपाल सिंह सरदार ने की।

गन्ना एक फसल नहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि चीनी के बढ़ते बाजार मूल्य के साथ एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए गन्ना मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण किया जाना चाहिए।

बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को मिले मुआवजा

ज्ञापन में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग समेत अन्य फसलों को हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराने की मांग की गई। किसानों ने प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने और फसल बीमा का लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इसके अलावा कोल्ड स्टोर के किराये में सरकार की ओर से दी जा रही सहायता का लाभ उन किसानों को भी देने की मांग की गई, जिन्होंने शासनादेश जारी होने से पहले ही आलू की निकासी कर ली थी।

आलू बीज के दाम कम करने की मांग

किसानों ने उद्यान विभाग की ओर से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराए जा रहे आलू के बीज को महंगा बताते हुए इसकी कीमत बाजार भाव के अनुरूप अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल रखने की मांग की।

उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों में नाम दर्ज नहीं होने के कारण वास्तविक खेती करने वाले ठेका और बटाईदार किसानों को मुआवजे से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए संयुक्त सत्यापन की विशेष व्यवस्था लागू की जाए।

ज्ञापन में समितियों और विक्रय केंद्रों पर फसलों की जरूरत के अनुसार पर्याप्त खाद एवं अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। किसानों ने कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी

पवन हूण गुर्जर ने कहा कि किसान प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती कृषि लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच खेती करने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार को किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र प्रभावी निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

इस दौरान मोनू त्यागी, जितेंद्र नागर, राधेलाल त्यागी, दुर्गेश तोमर, सत्या गुर्जर, सुधीर त्यागी, कटार सिंह, रूपराम, मनोज, विजेंद्र अधाना, पारुल त्यागी, लीले सिंह, डॉ. ओंकार, सुनील शर्मा, अरुण त्यागी, महेंद्र त्यागी, पूरन सिंह, लाला मावी, विक्रम, सुनील विधूड़ी, संजय त्यागी चेयरमैन, विनीत पसवाड़ा, अमरीश और जयवीर समेत सैकड़ों किसान व संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे।

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