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ब्रजघाट-गंगा एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से बदलेगी एक लाख लोगों की जिंदगी, कई गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

Published: Thu, 14 May 2026 05:26 PM (IST)

गढ़मुक्तेश्वर में एक पुल और सड़क के निर्माण से दिल्ली-लखनऊ हाईवे से गंगा एक्सप्रेसवे तक की कनेक्टिविटी सुधरेगी। यह परियोजना ...और पढ़ें

तीर्थ नगरी ब्रजघाट। जागरण आर्काइव

तीर्थ नगरी ब्रजघाट। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. दिल्ली-लखनऊ हाईवे से गंगा एक्सप्रेसवे तक सीधी कनेक्टिविटी।

  2. छह से अधिक गांवों की एक लाख आबादी को लाभ।

  3. पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

ध्रुव शर्मा, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। दिल्ली लखनऊ हाईवे स्थित ब्रजघाट से यदि गंगा एक्सप्रेसवे तक अर्द्ध निर्मित सड़क को पूर्ण कर दिया जाए तथा एक का निर्माण हो जाए तो छह से अधिक गांवों की तश्वीर बदल जाएगी तो वहीं दोनों एक्सप्रेसवे की कनेक्टेविटी होने से स्थानीय लोगों का सफर आसान हो जाएगा।

सिस्टम में बैठे लोगों एवं जनप्रतिनिधी अपनी दृढ इच्छा शक्ति के साथ यदि थोड़ा सा ध्यान सुविधाओं से वंचित अपने क्षेत्र के पिछड़े गांवों की तरफ दे तो छह से अधिक गांवों में रहने वाली करीब एक लाख की आबादी की तश्वीर बदल जाएगी। दरअसल दिल्ली- लखनऊ हाईवे के किनारे बसी तीर्थ नगरी ब्रजघाट से एक रास्ता पलवाड़ा होते हुए सलारपुर तक जाता है।

रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं 

यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। इसी मार्ग के बलवापुर गांव के पास से एक रास्ता सीधे पुष्पावती पूठ तथा शंकराटीला गांव को जाता है। करीब सात किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर करीब पांच किलोमीटर की सड़क बनी हुई है। लेकिन दो किलोमीटर का रास्ता बामुश्किल से बदहाल हालत में है। इसी मार्ग पर एक नाला पड़ता है।

यदि इस नाले पर पुल निर्माण तथा बदहाल पड़ी सड़क को ठीक करा दिया जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे तथा दिल्ली लखनऊ हाईवे के बीच कनेक्टेविटी सीधी हो जाएगी। अभी ब्रजघाट की तरफ से जाने वाले लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए 18 किलोमीटर की दूरी तय करके सदरपुर अथवा सिंभावली पहुंचना पड़ता है।

इसके बाद सिंभावली से शंकराटीला तक पहुंचने के लिए करीब 22 किलोमीटर तो सदरपुर से 15 किलोमीटर का सफर यानि करीब 32 से 40 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। उपरोक्त सड़क बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र आठ किलोमीटर रह जाएगी।

बदल जाएगी तस्वीर

पांड़वों की सैरगाह तथा अन्य धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध गंगा तट पर बसे पुष्पावती पूठ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दो वर्ष चुना गया था। लेकिन यहां पहुंचने के लिए आम जनता को 22 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। यदि उपरोक्त समस्या को जनप्रतिनिधि अथवा सिस्टम में बैठे लोग सुलझा दे तो पूठ सहित नवादा, शंकराटीला, क्रियावली, आलमनगर, शेरपुर में रहने वाली एक लाख से अधिक की आबादी की तश्वीर बदल जाएगी। 22 किलोमीटर का सफर चार से आठ किलोमीटर में सिमट कर रह जाएगा। इसी के साथ शिक्षा एवं विकास के क्षेत्र में पिछड़ रहे इन गांवों में विकास की बयार बहने लगेगी।

रोजगार के मिल जाएंगे साधन

यदि इस सड़क एवं पुल का निर्माण हो जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे एवं दिल्ली लखनऊ हाईवे किनारे बसी तीर्थ नगरी ब्रजघाट की दूरी चंद मिनटों की रह जाएगी। राहगीरों के गुजरने तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलने से यहां रहने वाले लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो जाएंगे तो वहीं तीर्थ नगरी में बढ़ती ीाभीड़ का दबाव कम हो जाएगा। बता दे कि पूठ एवं शंकराटीला आदि गांवों में करीब 40 प्रतिशत से अधिक आबादी अशिक्षित है। इन सुविधाओं के मिलने से यहां के लोग मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे।

पूठ शंकराटीला का धार्मिक महत्व

  • पांडवों का सैरगाह स्थल
  • कौरव पांडवों का शिक्षा स्थल
  • अनेक पुरातन मंदिर एवं स्थल
  • संतों की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध
  • स्वर्गद्वारी के नाम से प्रसिद्ध गंगा घाट

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यदि इस पुल एवं सड़क के बनने से कई गांवों के लोगों को सहुलियत मिलती है तो इस कार्य को मैं प्राथमिकता के तौर पर पूर्ण करने का प्रयास करुंगा।

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हरेंद्र सिंह तेवतिया, विधायक गढ़मुक्तेश्वर

इस समस्या को हल करने के लिए ग्रामीणों से वार्ता कर वस्तुस्थिति को समझा जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग को पत्राचार कर जल्द ही समस्या का अंत कर विकास को नई गति दी जाएगी।

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रेखा नागर हुण, जिला पंचायत अध्यक्ष