कुर्सी DM की, अंदाज भी अफसरों वाला..., 7वीं की छात्रा निधि बनी एक दिन की जिलाधिकारी
हापुड़ में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्रा निधि ने एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी बनकर महिलाओं की शिकायतें सुनीं और उनके समाधान के निर्देश दिए।
HighLights
छात्रा निधि ने हापुड़ में एक दिन की सांकेतिक डीएम बनीं।
महिलाओं की शिकायतें सुनीं और उनके निस्तारण के निर्देश दिए।
मिशन शक्ति अभियान ने बालिकाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाई।
केशव त्यागी, हापुड़। हापुड़ में डीएम की कुर्सी पर बैठकर महिलाओं की फरियाद सुनना और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश देना। बुधवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा निधि ने एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी बनकर कुछ इसी अंदाज में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई।
मिशन शक्ति अभियान के पांचवें चरण के तहत मिली इस जिम्मेदारी ने निधि को प्रशासनिक कामकाज समझने और नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर दिया। जिलाधिकारी कविता मीना की अध्यक्षता में हुई इस पहल के तहत छात्रा निधि को कलक्ट्रेट में जनसुनवाई का अनुभव कराया गया।

निस्तारण के भी दिए निर्देश
इस दौरान उन्होंने महिलाओं से संबंधित शिकायतें सुनीं और उनके निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। एक दिन की जिलाधिकारी के रूप में निधि ने केवल शिकायतें ही नहीं सुनीं, बल्कि महिला सुरक्षा और बालिकाओं के हितों से जुड़े विषयों पर भी जानकारी ली।
निधि ने मिशन शक्ति के तहत संचालित महिला सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा की। साथ ही कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
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इस पहल के माध्यम से उन्हें समझने का अवसर मिला कि महिलाओं की समस्याओं के समाधान और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन की क्या भूमिका है।
बेटियां किसी से कम नहीं
जिलाधिकारी कविता मीना ने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की बेटियां आत्मनिर्भर बनकर देश का भविष्य बनेंगी। निधि जैसी छात्राएं पूरे जनपद का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने छात्रा को प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मिशन शक्ति अभियान के तहत की गई इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ उन्हें महिला सुरक्षा, अपने अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करना है।
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