जागरण संवाददाता, हापुड़ : कोरोना की दूसरी लहर के बाद भी उद्योगों ने दम नहीं तोड़ा। इस बार जिले में 600 से अधिक छोटी और बड़ी इकाइयां लगी हैं। वहीं, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये के ऋण उद्यमियों को दिए गए। जिससे कि उद्योग रफ्तार पकड़ सकें और लोगों को अधिक से अधिक संख्या में रोजगार मिल सके। हालांकि, इस साल भी जिले को इंडस्ट्रियल एरिया की सौगात नहीं मिल सकी है। हापुड़ जिले से सड़कों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। यही कारण है कि उद्यमी जिले में फैक्ट्रियां लगा रहे हैं, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं, क्योंकि कई फैक्ट्रियों में इस वर्ष आग लगी। जिस कारण उद्यमियों को करोड़ों का नुकसान हुआ। इसके बाद भी अग्निशमन विभाग ने सबक नहीं लिया है।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच भी पिलखुवा की चादरों की धूम रही। कुछ समय के लिए इनके निर्माण पर प्रभाव पड़ा, लेकिन साल के अंत तक व्यापार ने जोर पकड़ा। अब करोड़ों रुपये का व्यापार हो रहा है। चीन की चादरों को भी पिलखुवा में निर्मित चादरों ने मात दी है। इन योजनाओं से दिया लाभ : उद्योग विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार, एक जनपद, एक उत्पाद के तहत 2.60 करोड़ के ऋण दिए गए हैं। 207 लोगों को इन योजनाओं के तहत ऋण दिए गए हैं। इनसे करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिला है। यहां लगीं फैक्ट्रियां : जिले में कोई इंडस्ट्रियल एरिया नहीं है। धीरखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया मेरठ जिले में आता है। धौलाना-मसूरी इंडस्ट्रियल एरिया गाजियाबाद जिले में शामिल है। हालांकि, यूपीएसआइडीसी जिले में शामिल है। यहां कुछ फैक्ट्रियां लगी हुई हैं। यही कारण है कि उद्यमी जिले के लिए अलग से इंडस्ट्रियल एरिया की मांग कर रहे हैं। जिससे कि एक ही स्थान पर उन्हें सारी सुविधाएं मिल सकें। लेकिन, इंडस्ट्रीयल एरिया न होने के कारण जिले में गली-मोहल्लों में फैक्ट्रियां लग रही हैं। इस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिले में इस वर्ष करीब 600 छोटी और बड़ी इकाईयां लगी हैं। साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों का ऋण दिया गया है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

- पंकज निर्वाण, सहायक आयुक्त उद्योग

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