गंगा के उफान से गढ़मुक्तेश्वर में गहराया बाढ़ का संकट, कई गांवों और मुख्य रास्तों पर जलभराव
गढ़मुक्तेश्वर में गंगा का जलस्तर 53 सेंटीमीटर कम हुआ है, लेकिन जंगलों में जलभराव से फसलें नष्ट हो गई हैं। ...और पढ़ें
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गंगा का जलस्तर।
HighLights
गंगा का जलस्तर 53 सेंटीमीटर कम हुआ।
जंगलों में जलभराव से फसलें नष्ट हुईं।
किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। गंगा में तेज उफान आने के बाद अब गंगा वापस अपने पुराने स्वरूप की तरफ बढ़ने लगी है। पिछले चार दिनों में गंगा का जलस्तर 53 सेंटीमीटर कम हुआ है। बावजूद इसके जंगलों में जलभराव होने के कारण लोगों की मुसीबत कम नहीं हो पा रही है।
गढ़मुक्तेश्वर स्थित गंगा में बुधवार से शनिवार तक गंगा लगातार उफान पर रही थी। शनिवार को गंगा का जलस्तर 198.92 मीटर पर पहुंच गया था।
इसके बाद गंगा खादर के गांवों चकलठीरा, गढ़ावली, लठीरा एतमोली, फरीदपुर एतमोली, गुलालपुर, शेरा कृष्ण वाली मंढैया, काकाठेर की मंढैया आदि गांवों में जलभराव होने के साथ ही रास्तों पर भी जलभराव हो गया था। करीब दस हजार बीघा जमीन में जलभराव हो गया था, जिससे दलहन, सब्जी, चारा आदि की फसलों पर संकट गहरा गया था।
लोगों को आवागमन के लिए नाव एवं ट्रैक्टर ट्राली का सहारा रह गया था। अब रविवार से बुधवार तक गंगा के जलस्तर में करीब 53 सेंटीमीटर की कमी आई है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 198.49 मीटर रह गया है।
रास्तों पर थोड़ी राहत मिली
वहीं, ऐसे में गांवों को जाने वाले रास्तों पर थोड़ी राहत मिली है, लेकिन जंगलों में जलभराव के कारण फसलों को भारी नुकसान हो गया है।
सब्जी एवं दलहन की फसल पूर्णतया नष्ट हो गई है तो वहीं चारे में भी गलन फैल गई है। अनेक किसानों ने तो लगान पर जमीन लेकर फसलों की बोआई की थी, जिससे अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
उधर, चारा आदि की व्यवस्था करने के लिए किसानों को ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस संबंध में एसडीएम श्रीराम यादव का कहना है कि गंगा का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। बावजूद इसके प्रशासन लगातार निगाह बनाए हुए है तथा बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बांटी जा रही है।
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