हापुड़: आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर, रात के सन्नाटे में पनीर और क्रीम में मिलाए जा रहे जानलेवा केमिकल
हापुड़ में केमिकल से नकली पनीर और क्रीम बनाने का गोरखधंधा चल रहा है, जिसकी सप्लाई दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी यूपी तक होती है।

पनीर-क्रीम में घोला जा रहा केमिकल
HighLights
हापुड़ में केमिकल से नकली पनीर-क्रीम निर्माण का आरोप
रात में धधकती भट्ठियां, सुबह दिल्ली-हरियाणा सप्लाई
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। गली-कूंचों से जंगल तक... दिन के उजाले में वीरान और रात के अंधेरे में धधकती भट्ठियां। यहां दूध से नहीं, बल्कि कथित रूप से केमिकल और अन्य संदिग्ध पदार्थों के सहारे पनीर-क्रीम तैयार किए जाने का खेल चलने के आरोप हैं।
रातभर चलने वाली इन भट्ठियों से तैयार माल सुबह होने से पहले ही दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाजारों की ओर रवाना होने की बात सामने आ रही है। कहीं लाइसेंस में निर्माण स्थल कुछ और दर्ज है तो उत्पादन दूसरे ठिकाने पर होने के आरोप हैं। तैयार माल को छिपाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भंडारण किए जाने की आशंका भी जांच का विषय है।
दूध की खरीद का रिकार्ड कहां है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्रीम व पनीर निर्माण इकाइयों तक केमिकल की कथित खेप आखिर कैसे पहुंच रही है? दूध की खरीद का रिकार्ड कहां है? निर्माण स्थलों की नियमित जांच कौन कर रहा है? खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इकाइयों के लाइसेंस निरस्त करने और मिलावटी पनीर के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बावजूद निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा था तो जिम्मेदारों की नजरों से अब तक कैसे बचा रहा। अब कार्रवाई छोटी इकाइयों तक सीमित नहीं रहने पाएऔर कथित सप्लायरों, खरीदारों और पूरे नेटवर्क की कड़ियां तक भी खंगाली जाएं।
कच्चे रास्तों, छोटी गलियों और तालाबों व खेतों के किनारे स्थित कुछ ठिकाने दिन में वीरान नजर आते हैं, लेकिन रात में वहां गतिविधियां बढ़ने के आरोप हैं। जिले के धौलाना, सिंभावली, बाबूगढ़ और गढ़मुक्तेश्वर समेत विभिन्न क्षेत्रों में क्रीम, मावा व पनीर निर्माण इकाइयों की गतिविधियां जांच के दायरे में हैं।
हरियाणा से दिल्ली तक फैला सप्लाई नेटवर्क
हापुड़ में तैयार किए जा रहे कथित अधोमानक क्रीम-पनीर की सप्लाई का नेटवर्क आसपास के जिलों से लेकर दिल्ली और हरियाणा तक फैला होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि रात में तैयार होने वाला पनीर सुबह वाहनों के जरिए अलग-अलग बाजारों में भेज दिया जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में कुछ इकाइयों पर शिकंजा कसे जाने के बाद अब सप्लाई चेन की पड़ताल भी जरूरी हो गई है। विभाग को यह पता लगाना होगा कि तैयार माल किन कारोबारियों तक पहुंचा, किन प्रतिष्ठानों में इसकी आपूर्ति हुई और कितनी मात्रा बाजार में खपाई जारही है।
मिलावट के खिलाफ जारी है अभियान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के उपायुक्त चंद्रशेखर मिश्रा के अनुसार, जिले में इस बार सबसे अधिक मिलावटी और असुरक्षित क्रीम-पनीर पकड़ा गया है और उसे नष्ट कराया गया है।
विभाग ने दर्जनभर इकाइयों के लाइसेंस निरस्त किए हैं। पनीर निर्माण में केमिकल की आपूर्ति के मामले में एडीएम कोर्ट में कार्रवाई चल रही है। मिलावट के नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
