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चिकित्सकीय सलाह पर ही खाएं एंटीबायोटिक, स्वयं खाएंगे तो पछताएंगे; हापुड़ के आरोग्य अस्पताल के डॉक्टर का सुझाव

Published: Thu, 12 Feb 2026 04:26 AM (IST)

हापुड़ के आरोग्य अस्पताल के डॉ. राहुल ने एंटीबायोटिक दवाओं के बिना चिकित्सकीय सलाह सेवन के खतरों पर जोर दिया। ...और पढ़ें

आरोग्य अस्पताल में एएमआर पर प्रहार कार्यक्रम का आयोजन।

आरोग्य अस्पताल में एएमआर पर प्रहार कार्यक्रम का आयोजन।

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जागरण संवाददाता, हापुड़। आरोग्य अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राहुल ने कहा कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना इतना खतरनाक साबित हो सकता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एंटीबायोटिक दवा का सेवन चिकित्सकीय परामर्श पर ही करना चाहिए। अन्यथा इससे एएमआर का खतरा बन जाता है। एएमआर के कारण गंभीर बीमारियों में मरीजों को बचाना तक मुश्किल हो जाता है।

डॉ. राहुल आरोग्य अस्पताल में दैनिक जागरण व आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के संयुक्त अभियान में आयोजित एएमआर पर प्रहार कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों की आदत होती है कि यदि किसी को बुखार आता है तो वह मेडिकल स्टोर पर पहुंच जाते हैं और उनके द्वारा दी गई एंटीबायोटिक दवाई खा लेते हैं।

जबकि लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि उन्होंने दवाई कौन सी खा ली है। ऐसे एक प्रतिशत मरीज ही होते हैं, जो खांसी, जुकाम, सामान्य बुखार या अन्य वायरल बीमारी में चिकित्सकीय परामर्श लेकर दवाई खाते हैं। जब ऐसे जागरूक मरीज आते हैं तो चिकित्सक को भी खुशी होती है।

उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की बीमारी में काम आती है। लेकिन अंधाधुंध और बिना चिकित्सक की सलाह के लेने से एंटीबायोटिक शरीर के हेल्दी बैक्टीरिया को मार देती है। जिसके बद अन्य दवाएं भी कार्य करना बंद कर देती हैं। एंटीबायोटिक बीमारी के बैक्टीरिया को मारने के लिए बनाई जाती है।

शरीर में जाने के बाद एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को मार तो देती है, लेकिन उसे पूरी तरह से मारने के लिए दवा का पूरा कोर्स होता है। अन्यथा बैक्टीरिया काफी तेज होता है, पूरी तरीके से न मरने पर वह फिर से शरीर में हमला करते हैं।

एंटीबायोटिक दवाई का कार्य बैक्टीरिया के सेलवाल को मारने या उसके डीएनए को मारने का कार्य करती है। पूरे तरीके से न मरने पर बैक्टीरिया म्यूटेशन हो जाते हैं, जिसके बाद एंटीबायोटिक बेअसर हो जाती है। वह दवाई उस बैक्टीरिया पर कार्य नहीं करती है। यही प्रक्रिया एएमआर कहलाती है। इस दौरान उपस्थित लोगों ने डा. राहुल से सवाल किए, जिनके उन्होंने आसान भाषा में जबाव दिए।

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