गाजियाबाद में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर जागरूकता कार्यक्रम, एएमआर के खतरों से किया सावधान
दैनिक जागरण और आईएमए ने गाजियाबाद के गुलमोहर एन्क्लेव में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पर जागरूकता ...और पढ़ें
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गाजियाबाद के गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के संयुक्त अभियान एएमआर पर प्रहार के अंतर्गत बुधवार को राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डा. अभिषेक वर्मा और डॉ. निधि अग्रवाल ने एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के बढ़ते खतरे पर लोगों को जागरूक किया।
डॉ. अभिषेक वर्मा ने बताया कि सामान्य सर्दी-जुकाम के करीब 90 प्रतिशत मामलों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती, इसके बावजूद लोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के सीधे मेडिकल स्टोर से दवाएं ले लेते हैं। यह प्रवृत्ति एएमआर को तेजी से बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बुखार आने से पहले ही एंटीबायोटिक शुरू कर देते हैं, जो बेहद खतरनाक है। एंटीबायोटिक की जरूरत, मात्रा और अवधि केवल चिकित्सक ही तय कर सकता है।
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राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी में दैनिक जागरण एएमआर पर प्रहार अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोग। जागरण
अधूरा कोर्स बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है: डॉ. निधि
डॉ. निधि अग्रवाल ने कहा कि गलत मात्रा, गलत समय और अधूरा कोर्स बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देता है, जिससे भविष्य में संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दवा पूरे कोर्स और सही डोज में ली जाती है, तभी संक्रमण पूरी तरह समाप्त होता है। लेकिन कई मरीज कुछ गोलियां लेकर ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे कुछ बैक्टीरिया जीवित बच जाते हैं और आगे चलकर अधिक शक्तिशाली बन जाते हैं।
परिणामस्वरूप भविष्य में उसी बीमारी के इलाज के लिए अधिक मात्रा या नई ज्यादा प्रभावी एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है। चिकित्सकों ने बताया कि बिना डाक्टर की सलाह लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने से किडनी और लिवर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। एंटीबायोटिक की डोज उम्र और वजन के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए स्वयं दवा लेना खतरनाक है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कई लोग केवल लक्षण बताकर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद लेते हैं, जो एएमआर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एंटीबायोटिक के सुरक्षित उपयोग और एएमआर से बचाव से जुड़े सवाल पूछे, जिनके चिकित्सकों ने विस्तार से उत्तर दिए और सुरक्षित दवा उपयोग का संदेश दिया।
दैनिक जागरण लगातार सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुख्ता से उठाता है। एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर इसी तरह के कार्यक्रम जरूरी है। -
आरके गर्ग, निवासी, गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी
आज हर गली में मेडिकल स्टोर है और बिना डाक्टर की सलाह एंटीबायोटिक दवा मिल जाती है। यह सुविधा नहीं, बल्कि आने वाले समय में खतरा बन सकती है।
- गौरव बंसल, सोसायटी निवास, गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी
सोसायटी स्तर पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम होते रहने चाहिए। मैं दैनिक जागरण का धन्यवाद करता हूं। ऐसे कार्यक्रमों से लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते है।
- बिजेंद्र गिरी, एओए अध्यक्ष, गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी
