Hamirpur Dangal: घूंघट में अखाड़े में उतरीं महिलाएं, एक-दूसरे को दी पटकनी; अंग्रेजों के दौर से चली आ रही दंगल की ये परंपरा
हमीरपुर के लोदीपुर निवादा गांव में घूंघट में महिलाओं का दंगल आयोजित हुआ, जो अंग्रेजों के समय से आत्मरक्षा के ...और पढ़ें
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मुस्करा के लोदीपुर निवादा गांव में रक्षाबंधन के दूसरे दिन आयोजित दंगल में दावपेंच दिखाती गांव की महिलाएं व महिला दर्शकों की लगी भीड़। जागरण
HighLights
हमीरपुर के लोदीपुर निवादा गांव में हुआ महिला दंगल
अंग्रेजों के समय से चली आ रही आत्मरक्षा की परंपरा
दंगल में बुजुर्ग महिलाओं ने ढोल बजाकर भरा जोश, उमड़ी भीड़
संवाद सूत्र, खड़ेहीलोधन (हमीरपुर)। अंग्रेजों से लड़ने के लिए सीखी गई महिलाओं की कुश्ती आज गांव में आयोजित होने वाले दंगल की परंपरा को निभा रही है। इस दंगल में महिलाएं घूंघट की ओट पर कुश्ती लड़ती हैं और बहू बेटियां ही इस दंगल में दर्शक रहती हैं।
शनिवार को हमीरपुर जिले के मुस्करा विकासखंड के लोदीपुर निवादा गांव में महिलाओं का यह दंगल आयोजित हुआ। जिसमें गांव की महिलाओं ने उत्साह से प्रतिभाग किया और एक दूसरे को पटकनी देकर दंगल की विजेता बनीं। इस दंगल को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। दंगल के बाद महिला ग्राम प्रधान गिरिजा देवी के द्वारा विजेता महिलाओं को पुरस्कृत भी किया गया।
यह दंगल हर वर्ष रक्षाबंधन के दूसरे दिन कजली पर्व के दिन आयोजित किया जाता है। इस अखाड़े के आसपास किसी भी पुरुष को आने की इजाजत नहीं होती है। यहां तक कि पुरुष अपने घरों के अंदर रहते हैं या गांव से बाहर चले जाते हैं। गांव की बहुएं और युवतियां पारंपरिक साड़ी व कपड़े पहनकर और घूंघट डालकर अखाड़े में कुश्ती लड़ती हैं।
वहीं गांव की बुजुर्ग महिलाएं ढोल बजाकर और थाप देकर कुश्ती लड़ रही महिलाओं का जोश बढ़ाती हैं। शनिवार को आयोजित हुए इस दंगल में महिलाओं ने अपने दावपेंच दिखाए और दंगल में प्रतिभाग किया। इस दंगल में गांव की मालती शुक्ला ने माया गुप्ता को पटकनी दी। कौशिल्या ने मुलिया को पटका।
रामसखी ने शकुंतला को चित्त कर दिया। संपत सविता ने श्यामा पाल को हराया। विद्या सविता और मोहनी के बीच हुई कुश्ती में विद्या विजयी रहीं। रानी भुर्जी व मीरा सविता के बीच हुए मुकाबले में रानी भुर्जी ने कुश्ती जीती। इसके अलावा अन्य कई कुश्तियां भी महिलाओं के बीच हुईं।जिसे देखने के लिए गांव की युवतियां और महिलाओं की भारी भीड़ रही।
प्रतियोगिता के अंत में गांव की महिला विजेता और उपविजेता महिलाओं को ग्राम प्रधान गिरजा देवी के द्वारा नकद इनाम और उपहार देकर सम्मानित गया। रेफरी की भूमिका अभिलाषा गुप्ता व पूजा गुप्ता ने निभाई।
दंगल का इतिहास
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पति व रिटायर्ड मैनेजर नाथूराम ने बताया कि हमारे बुजुर्ग बताया करते थे यह परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है। जब अंग्रेजों के अत्याचार से गांव के पुरुष अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर चले जाते थे तो अंग्रेजों से उनका सामना करने और आत्मरक्षा के लिए उस समय की महिलाओं ने सारे दांवपेच सीख लिए। यह दंगल बुंदेलखंड की नारी शक्ति, उनकी आत्मनिर्भरता और अनूठी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है।
