संवाद सूत्र, कुरारा : कोविड अस्पतालों में अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए चिकित्सकों के साथ स्टाफ नर्स द्वारा द्वारा खासी मेहनत की जा रही है। डॉक्टर मरीजों को जांच के बाद दवा का निर्धारण करते हैं। वहीं इन दवाओं को मरीजों को देने के साथ उन्हें हिम्मत देते उनका ध्यान रखती है। ऐसा ही जज्बा रखती है कस्बा स्थित कोविड एल टू हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स प्रियंका। जिन्होंने खुद कोरोना जंग जीतने के बाद संक्रमितों के इलाज का जिम्मा संभाल रखा है। स्टाफ हो या मरीज हर कोई उनकी हिम्मत और लगन की तारीफ करता है।

कानपुर देहात के अकबरपुर निवासी स्टाफ नर्स प्रियंका पाल कस्बा स्थित कोविड एल-टू हॉस्पिटल में तैनात हैं। बीते अप्रैल के शुरुआत में जब कुरारा सीएचसी को कोविड-19 अस्पताल में परिवर्तित किया गया तो कुछ ही दिन मरीजों की सेवा के बाद वह स्वयं कोरोना पॉजिटिव हो गईं।

उन्होंने कोरोना को मात देकर कुछ दिनों बाद ही उन्होंने फिर से कोरोना से पीड़ित मरीजों की सेवा करना शुरू कर दिया। हालांकि मौजूदा में उन्हें प्लेटलेट्स कम होने के चलते एक सप्ताह का अवकाश दिया गया है।

(सलाम सिस्टर) (16)

मेरे ठीक होने में नर्स की अहम भूमिका

कुरारा कस्बा स्थित कोविड एल-टू हॉस्पिटल से कोरोना जंग जीतकर लौटने में वहां के चिकित्सकों के साथ नर्सो का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सुबह छह बजे बेड पर पहुंच नर्स ऑक्सीमीटर से पल्स और आक्सीजन चेक करती थी। दवाएं देती थी साथ ही बताई गई समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उन्हें नोट करती थी। फिर बिदुवार चिकित्सक से कंसल्ट कर दवाएं बदलकर देती थी। वहीं एक दिन मुझे ऑक्सीजन लगाई गई। उस दिन ड्यूटी में तैनात नर्स हर घंटे डेढ़ घंटे में मेरे पास पहुंच मेरा हाल जानती थी।

- अनुराग तिवारी, रमेड़ी तरौस हमीरपुर

(डॉक्टर से कम नहीं नर्से) (17)

विषम परिस्थितियों में देतीं डाक्टर का साथ

सदर महिला चिकित्सालय में तैनात नर्स रमकांती को अनुभवी माना जाता है। यहीं कारण है कि विषम परिस्थितियों में मरीज के इलाज को लेकर डाक्टर भी उनकी राय लेते है। ऐसे में वह उनका पूरा साथ भी देती है। स्टाफ के अनुसार नर्स रमाकांती को काम करते लंबा समय इसी अस्पताल में बीत गया। वह तीन चार माह बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगी। कुछ ऐसी ही राय है नर्स राधा को लेकर, जिन्होंने अब तक छह से सात कोरोना संक्रमित महिलाओं का डाक्टर के साथ मिलकर प्रसव कराया है।