हमीरपुर में पर्चा बनवाने में उलझाए रहे डॉक्टर, इमरजेंसी में मासूम ने तोड़ा दम
हमीरपुर जिला अस्पताल में डेढ़ माह के मासूम की कथित तौर पर उपचार में देरी के कारण मौत हो गई। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
डेढ़ माह के मासूम की अस्पताल में मौत।
इमरजेंसी डॉक्टर पर उपचार में देरी का आरोप।
जिलाधिकारी ने घटना की जांच के दिए आदेश।
जागरण संवाददाता, हमीरपुर। डेढ़ माह के मासूम की तबीयत बिगड़ने पर शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तत्काल उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। स्वजन का आरोप है कि गंभीर हालत में 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचने पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने बच्चे को देखने के बजाय पर्चा बनवाकर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए भेज दिया।
करीब 20 मिनट तक पिता पर्चा बनवाने को लाइन में लगे रहे। जब पर्चा लेकर बच्चे के पास पहुंचे तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। बच्चे की मौत के बाद स्वजन ने हंगामा किया। उसी दौरान अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी अशोक कुमार को पीड़ित पिता ने पूरी घटना बताई।
इस पर उन्होंने सीएमओ डॉ. अलका शुक्ला व सीएमएस डा. आरएस प्रजापति को जांच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। संदीप निषाद ने बताया पत्नी माया का प्रसव बिवांर स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। बीते बुधवार को आशा बहू सुनीता की मौजूदगी में गांव के पंचायत भवन में एएनएम ने बेटे को टीका लगाया था। इसके बाद उसे बुखार आ गया था।
हालत बिगड़ने पर शुक्रवार सुबह पत्नी माया व मां सीतारानी के साथ उसे मुस्करा स्थित अस्पताल ले गए। आरोप है कि वहां से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां इमरजेंसी में तैनात डा. नवनीत ने लापरवाही की। उधर, इमरजेंसी में तैनात डा. नवनीत ने बताया कि बच्चा उनके पास मृत अवस्था में ही लाया गया था।
हालांकि, इस प्रकरण ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने कहा कि गंभीर मरीज को पहले भर्ती कर उपचार करना चाहिए, लेकिन चिकित्सक मरीजों के स्वजन को परेशान करते हैं। पर्चा बनवाकर ओपीडी में दिखाने को टरका देते हैं या फिर मरीज को कानपुर रेफर कर देते हैं। इसीलिए कई बार इमरजेंसी में मारपीट तक हो चुकी है।
