विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पेड़ से प्रकट हुई थीं माता की मूर्ति, अंग्रेज अफसर भी टेकते थे माथा; यूपी के चौरादेवी मंदिर का दिलचस्प है इतिहास

Published: Wed, 14 Oct 2026 02:18 PM (IST)

हमीरपुर का चौरादेवी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, जिसका इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है।

यमुना किनारे स्थित चौरादेवी मंदिर

यमुना किनारे स्थित चौरादेवी मंदिर

HighLights

  1. ब्रिटिश कलेक्टर की पत्नी ने बनवाया था चबूतरा।

  2. पीपल के पेड़ के नीचे प्रकट हुई थी देवी।

  3. हमीरपुर में यमुना किनारे स्थित प्रमुख आस्था केंद्र।

मोहित द्विवेदी, हमीरपुर। यमुना नदी के किनारे और जिलाधिकारी आवास के पास स्थित चौरादेवी मंदिर शहर की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार कभी यहां घने जंगल के बीच पीपल के पेड़ की ओट में देवी मां की मूर्ति विराजमान थी।

अंग्रेजी शासनकाल में तत्कालीन कलेक्टर एम एन्सले की पत्नी ने देवी की मूर्ति के सामने चूने और कंकरीट से चबूतरे का निर्माण कराया था। इसके बाद से यह स्थान चौरादेवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मंदिर के बुजुर्ग पुजारी रामदुलारे शास्त्री ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान तत्कालीन कलेक्टर एम एन्सले की पत्नी को सपने में पीपल के पेड़ की ओट में देवी की मूर्ति दिखाई दी थी। इसके बाद वह सुबह अंग्रेजी सैनिकों के साथ उस स्थान पर पहुंचीं और श्रद्धाभाव से देवी मां की पूजा-अर्चना की।

उन्होंने मूर्ति के सामने चूने और कंकरीट से एक बड़ा चबूतरा बनवाया। कहा कि शुरुआती दौर में देवी की मूर्ति पीपल के पेड़ की ओट में ही स्थापित थी। कुछ दशक पहले मूर्ति को वहां से हटाकर मंदिर के अंदर स्थापित करा दिया गया। स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित इन मान्यताओं के कारण मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है।

स्थानीय लोगों के सहयोग से मिला भव्य स्वरूप

मंदिर के संरक्षक सुरेंद्र चंद्र शर्मा ने बताया कि शुरुआती दौर में मंदिर का स्वरूप छोटा था। पिछले कुछ दशकों में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का विस्तार कराया गया। परिसर में राधा-कृष्ण, श्रीगणेश, साईं बाबा, शनिदेव, मां दुर्गा और भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर बनाए गए हैं।

वर्तमान में यहां करीब एक दर्जन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में मांगलिक और वैवाहिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

अंग्रेज अधिकारी भी आते थे माता के दरबार में

कई बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने पूर्वजों से चौरादेवी मंदिर के इतिहास के बारे में सुना है। उनके अनुसार, तत्कालीन अंग्रेज प्रशासक एम एन्सले ने देवी मां के सामने माथा टेका था और मूर्ति के सामने चबूतरा बनवाया था।

यह भी बताया जाता है कि अंग्रेज अधिकारी अपने परिवार के साथ नियमित रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते थे। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और आज यह शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

हरिद्वार के संत भी करते हैं दर्शन

मंदिर के पुजारी राम दुलारे शास्त्री ने बताया कि वह 15 माह पूर्व चौरादेवी मंदिर में मां की सेवा करने के लिए आए थे। बताया कि मां चौरादेवी के प्रति उनकी गहरी आस्था है।

उनके मुताबिक, हरिद्वार के संत स्वामी हंसानंद महाराज भी अक्सर मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यमुना नदी के किनारे स्थित चौरादेवी मंदिर आज धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहर की स्थानीय परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है।

यह भी पढ़ें- यूपी के शाहजहांपुर से गुजरी बांग्लादेश की ट्रेन, देखने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़