संवाद सहयोगी, भरुआ सुमेरपुर : उत्तर भारत के ख्याति प्राप्ति ब्रह्मलीन संत रोटीराम महाराज नागा स्वामी की तपोस्थली गायत्री तपोभूमि में गायत्री महायज्ञ की 61वीं वर्षगांठ के पांचवें दिन गायत्री तपोभूमि में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा पंडाल से लेकर यज्ञवेदी, मेले में भीड़ का रेला था। यज्ञवेदी में यज्ञाचार्य माधवा नारायण ने 37 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार विधि विधान के साथ आहुतियां देकर संपन्न कराया।

कथा व्यास ने पांचवें दिन कहा कि ज्ञान पाने के लिए संतों का सानिध्य जरूरी है। संतों द्वारा बताए गए मार्ग से भगवान से मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। यज्ञ वेदी में यज्ञाचार्य पंडित माधवा नरायण एवं यज्ञ के ब्रह्मा बल्देव प्रसाद शास्त्री ने आचार्य उमादत्त शुक्ला के नेतृत्व में 37 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया। सामूहिक आहूति के बाद सभी बटुकों ने शिक्षा ग्रहण की इसके बाद शिक्षा के लिए बनारस जाने की तैयारी की। जिन्हें समाजसेवी डा. आलोक पालीवाल ने रोककर यही शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रार्थना की। यज्ञोपवीत संस्कार के दौरान गायत्री महायज्ञ समिति के सभी सदस्य भी मौजूद रहे।

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