विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज: करीब साल भर पहले जो बसंतपुर गांव जरूरी सुविधाओं के लिए तरस रहा था, अब वहां शहर जैसा माहौल है। यहां के लोगों की जीवनशैली भी शहरियों जैसी हो गई है। पार्क में बच्चे उछल-कूद करते हैं तो युवा जिम में पसीना बहाते दिखते हैं। योग केंद्र में रोजाना योगासन करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। बैडमिंटन कोर्ट है जहां युवा अपनी प्रतिभा निखारते हैं। बड़े-बुजर्ग भी अब सुबह-शाम पार्क में पहुंच कर बैठकी करते हैं।

बसंतपुर में यह बदलाव वर्षों में नहीं, सिर्फ 14 महीने में आया है। इसके पीछे ग्राम प्रधान अनामिका सिंह की सोच व दृढ़ इच्छाशक्ति है। अबतक मनरेगा, राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त से 94 लाख के कार्य हो चुके हैं। कुछ काम नए हुए हैं तो पहले से बने भवनों का कायाकल्प भी हुआ है। बेहतर सड़कें, पक्की नालियां व मिनी सचिवालय गांव में विकास की कहानी बयां कर रहे हैं। 2025 वर्ग मीटर में बने मनरेगा पार्क को सजाने-संवारने में छह माह का समय लगा। करीब 35 लाख रुपये खर्च हुए। भव्य गेट, फव्वारा व रंग-बिरंगे फूल पार्क का आकर्षण बढ़ा रहे हैं।

आनामिका सिंह, ग्राम प्रधान बसंतपुर, महराजगंज

प्रधान अनामिका सिंह जो समाजशास्त्र में परास्नातक हैं, यहां की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। गांव के डीह टोला, घघरुआ व बड़ा टोला के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय साल भर पहले तक जर्जर हालत में थे। वर्षा के समय टपकती छत, टूटी खिड़कियां - दरवाजे व फर्श इनकी बदहाली की गवाही दे रहे थे। अब तस्वीर बदल चुकी है। घघरुआ टोले के प्राथमिक विद्यालय में पहले 16 बच्चे थे। अब संख्या 50 हो गई है। बड़ा टोले के विद्यालय में छात्र संख्या 150 व डीह टोला में 167 पहुंच गई है। आंगनबाड़ी केंद्र भी आकर्षण का केंद्र बना है। यहां के पंचायत भवन को अब मिनी सचिवालय का दर्जा मिल चुका है। इसके कायाकल्प के बाद अब ग्राम सभा की सभी बैठकें यहीं पर होतीं हैं। पंचायत भवन में लगा कंप्यूटर, सीसीटीवी व लोगों के बैठने का बेहतर इंतजाम है।

बसंतपुर गांव में बना आंगनबाड़ी केंद्र। जागरण

जल संरक्षण की नजीर बना गांव

जल संरक्षण में भी गांव नजीर पेश कर रहा है। भूगर्भ जल सामान्य रहे , इसके लिए गांव में लगे आठ इंडिया मार्क हैंडपंप के पास सोकपिट बनवाएं गए हैं। इससे एक बूंद पानी व्यर्थ न होकर सीधे सोकपिट में जाता है। इसी क्रम में ग्राम प्रधान ने मेरा तालाब मेरी आजीविका के तहत गांव में तीन नए तालाबों का निर्माण व दो तालाबों का सुंदरीकरण भी कराया है।

बसंतपुर गांव में बना मनरेगा पार्क। जागरण

महिलाओं को मिला रोजगार

ग्राम प्रधान की कोशिश से यहां की महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं। सरस्वती, एकता व गणेश महिला समूह का गठन हुआ। तीनों समूहों में इस समय 36 महिलाएं जुड़ी हैं। एकता महिला समूह दोना पत्तल, गणेश महिला समूह झाडू़ व सरस्वती स्वयं सहायता समूह द्वारा मिठाई का डिब्बा बनाया जा रहा है। तीनों समूहों के उत्पाद आज क्षेत्रीय बाजार में अपनी धाक जमा चुके हैं। उत्पादन से लेकर बिक्री तक सभी कार्य महिलाएं स्वयं करतीं हैं। इससे महिलाओं को पांच हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय हो रही है। समूह से जुड़ी सीमा देवी, साहिबा खातून ,बीना देवी, ललिता देवी, हसीबुन्निशा व जैलुनन शा ने बताया कि गांव में रोजगार मिलने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। मनरेगा पार्क तो गांव की शान बन चुका है।

नजीर बने यह कार्य

  • मनरेगा पोषण वाटिका का निर्माण
  • मनरेगा के माध्यम से 1.51 एकड़ में अमृत सरोवर का निर्माण
  • सामुदायिक शौचालय व दिव्यांग फ्रेंडली पिंक शौचालय का निर्माण
  • 2021-22 व 2022-23 में 4.750 किलोमीटर संपर्क मार्ग का कार्य
  • गांव के पंचायत भवन पर हर सोमवार को ग्राम समाधान दिवस का आयोजन

महराजगंज के बसंतपुर गांव के ग्राम प्रधान आनामिका सिंह ने बताया कि बसंतपुर को एक माडल गांव बनाने की सोच शुरू से थी। जब मौका मिला तो पहले दिन से ही इस कार्य में लग गई। सभी लोगों के सहयोग से इतने कम समय में विकास कार्य संभव हो सका है। कभी सोचा नहीं था कि इस कार्य के लिए मुझे सम्मानित किया जाएगा।

Edited By: Sanjay Pokhriyal