सिद्धार्थनगर : करीब तीन वर्ष पूर्व ही जनपद अभिलेखों में खुले में शौच से मुक्त हो चुका है, लेकिन धरातल पर जिम्मेदारों ने खेल ही किया है। डुमरियागंज ब्लाक क्षेत्र के पेंदा ग्राम पंचायत के तिलकहना डीह में करीब 100 घर हैं। एक भी घर में सरकारी अनुदान का शौचालय नहीं बना है। इस डीह में नाली का निर्माण भी नहीं हुआ। आवास योजना के लिए दर्जनों पात्र आस में छप्पर में जिदगी काटने को विवश हैं।

उक्त डीह की आबादी करीब 800 है। गांव के पूरब से प्रवेश करते ही विमलावती देवी घर के बगल गड्ढे में एकत्रित पानी बाल्टी से निकालकर फेंकती मिली। पूछने पर बताया की नाली नहीं बनी तो पानी कहां से निकले। गांव के ही गोबरी, मुरली, जोगेश निषाद ने बताया पूरे डीह में जल निकासी की कोई व्यवस्था नही है। जिससे सबके घरों के आसपास ऐसे ही गड्ढे बनाने की मजबूरी है। पृथी पुत्र हरखू अपने चार पुत्रियों व पांच पुत्र संग फूस के मकान के सामने बैठे किस्मत को कोसते मिले। कड़ाके की ठंड में दरवाजा विहीन मकान में सर्द हवा से बचने के लिए परिवार पुआल के सहारे रहता है। ऐसे एक दर्जन पात्र यहां हैं जिन्हें आवास योजना का इंतजार है। शौचालय न बनने से पूरा गांव सुबह शाम बाहर शौच जाता है। सबसे अधिक दिक्कत बाढ़ आने पर होती है। रविद्र कुमार, राम तौल, घनश्याम, नेहा यादव, नंदलाल ने बताया कि प्रधान से लेकर सचिव व बीडीओ तक दर्जनों बार अर्जी लगाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। शुद्धजल के लिए करीब एक वर्ष पूर्व बने ओवरहेड टैंक से केवल एक सप्ताह तक पानी मिला। फिर बंद होगया। पूरे डीह में एक मात्र इंडिया मार्क हैंडपंप लगा है। जिसके कारण अधिकांश डीह वासी देसी नल से प्यास बुझाते हैं।

बीडीओ डुमरियागंज अमित सिंह ने कहा अभी जल्द ही आया हूं, पूरी जानकारी नहीं है। जांच कर आवश्यकतानुसार विकास कार्य कराएं जाएंगे।

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