गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Manish Gupta Murder Case: मनीष हत्याकांड के आरोपित दारोगा विजय यादव से एसआइटी ने रामगढ़ताल थाने में तीन घंटे तक पूछताछ की। खुद को निर्दोष बताते हुए उसने कहा कि घटना के समय कमरे में नहीं था। इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने फोन करके बुलाया था। राहुल के साथ वह होटल पहुंचा था।घायल मनीष को वह लोग हास्पिटल ले गए थे।

खुद को बेगुनाह बताते हुए बोला जेएन सिंह के उसे व राहुल को बुलाया था

घटना के बाद से फरार चल रहे दारोगा ने अन्य आरोपितों द्वारा बताई गई कहानी दोहराई। उसने बताया कि 27 सितंबर की रात में राहुल दुबे के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहा था। रात में इंस्पेक्टर जेएन सिंह के हमराही ने फोन करके बताया कि साहब बुला रहे हैं। हम लोग होटल पहुंचे तो मनीष घायलावस्था में पड़ा था।इस मामले में उसकी कोई गलती नहीं थी। लेकिन हत्या का मुकदमा दर्ज हाेने के बाद डर गया और मोबाइल बंद करके फरार हो गया। साक्ष्य मिटाने के सवाल पर विजय ने चुप्पी साध ली। फरारी के दौरान किसने मदद की यह भी नहीं बताया।

अन्य आरोपितों की तरह विजय भी रात में जेल गया

मनीष गुप्ता हत्याकांड के बाद आमजन गुस्से में है।आरोपितों काे अस्पताल ले जाते समय कोई घटना न हो इसलिए उनका मेडिकल थाने में कराने के बाद रात को अदालत में पेश किया गया।शनिवार को कैंट पुलिस ने विजय यादव को दोपहर में गिरफतार कर लिया। पूछताछ के बाद देर शाम को एसआइटी ने रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया। बता दें क‍ि विजय यादव को कैंट पुलिस ने शनिवार की दोपहर रेलवे म्यूजियम के पास गिरफ्तार किया था। जौनपुर  जिले के रहने वाले विजय पर एक लाख रुपये का इनाम था वह कोर्ट में सरेंडर करने गोरखपुर आया था। 

यह है मामला

कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर घूमने आए थे। उनके साथ हरियाणा के उनके दोस्त हरबीर और प्रदीप भी थे। तीनों युवक तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में रुके थे। रामगढ़ताल थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह समेत छह पुलिसकर्मी रात करीब साढ़े 12 बजे कमरे की तलाशी लेने पहुंच गए। आधी रात को इस तरह कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और पुलिस टीम ने पीट-पीटकर मनीष की हत्या कर दी।

Edited By: Pradeep Srivastava