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नाम बदला, पता बदला... और बन गया फर्जी पासपोर्ट; जानिए UP में कैसे फल-फूल रहा यह गिरोह

By Navneet Prakash TripathiEdited By: Vivek Shukla
Published: Tue, 18 Aug 2026 11:24 AM (GMT+05:30)

विदेश भेजने वाले एजेंट फर्जी पासपोर्ट गिरोह से भी जुड़े हैं, जो मोटी रकम लेकर जाली दस्तावेज बनवाते हैं। गोरखपुर ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. एजेंट फर्जी पासपोर्ट गिरोह से मिलकर बनाते हैं जाली दस्तावेज।

  2. गोरखपुर, देवरिया समेत यूपी में फर्जी पासपोर्ट के कई मामले।

  3. पुलिस जांच में एजेंटों तक पहुंचना अभी भी बड़ी चुनौती।

नवनीत प्रकाश त्रिपाठी, गोरखपुर। विदेश भेजने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से धोखाधड़ी करने वाले कथित एजेंट और प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालक फर्जी पासपोर्ट बनवाने के नेटवर्क से भी जुड़े हैं। ये फर्जीवाड़ा कर जरूरी दस्तावेज तैयार कराते हैं और मोटी रकम लेकर पासपोर्ट बनवा देते हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस आमतौर पर सिर्फ उस व्यक्ति के विरुद्ध ही कार्रवाई करती है, जिसके नाम से पासपोर्ट बना होता है।

जाली दस्तावेज तैयार कराने और पुलिस तथा अन्य जांच औपचारिकताएं पूरी कराने वालों तक पहुंचने का प्रयास नहीं होता। यही वजह है कि पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामले आए दिन सामने आने के बाद भी पुलिस के हाथ उन कथित एजेंटों या प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों के गिरेबां तक नहीं पहुंच पाते, जो इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसी का लाभ उठाकर वांछित अपराधी भी इन एजेंटों की मदद से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागने में कामयाब हो जाते हैं।

कुख्यात गैंग्सटर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला के 2025 में गोरखपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर इंडोनेशिया फरार हो जाने की घटना इसका ताजा उदाहरण है। अमृतसर के रहने वाले जोबनजीत सिंह के विरुद्ध पंजाब में गंभीर धाराओं में 25 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

गोरखपुर में लच्छीपुर, थाना गोरखनाथ के पते पर उसने फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। हालांकि, पिछले दिनों जोबनजीत को इंडोनेशिया में गिरफ्तार कर लिया गया। गोरखपुर पुलिस उसे डिपोर्ट कर वापस लाने में सफल रही। गोरखपुर पुलिस के लिए वांछित चल रहे नौ अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश में रह रहे हैं।

2024 से अगस्त 2026 के बीच गोरखपुर में पासपोर्ट फर्जीवाड़े के 78 मुकदमे हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर मामलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने के मामले हैं। बिना वर्क परमिट और वर्क एग्रीमेंट के विदेश जाकर किसी रोजगार से जुड़ने वाले लोगों का पासपोर्ट पकड़े जाने पर रद कर दिया जाता है। ऐसे में रोजगार की तलाश में दोबारा विदेश जाने के लिए कुछ लोग कथित प्लेसमेंट एजेंसियों और एजेंटों की मदद से अपने या पिता के नाम में मामूली हेरफेर कर फर्जी दस्तावेजों की मदद से दूसरा पासपोर्ट बनवा लेते हैं।

देवरिया में एजेंट ने एक ही परिवार के पांच लोगों का बनवा दिया फर्जी पासपोर्ट
विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों और प्लेसमेंट एजेंसिजयों ने फर्जी पासपोर्ट बनवाने में भी अपनी जड़ें काफी गहरी कर ली है। उनका संजाल इतना जबरदस्त है कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद होने वाली जांच में भी उनकी जालसाजी पकड़ में नहीं आती है। देवरिया जिले में एकौना थाना क्षेत्र के नगवां खास गांव में एक ही परिवार की एक महिला सहित पांच लोगों का एक साथ फर्जी पासपोर्ट बन जाना इसका उदाहरण है।

नगवां खास निवासी रामलखन, उनकी पत्नी सावित्री देवी, भाई रामहरख, बेटे मंटू यादव और रामहरख के पुत्र राजू यादव ने पहले से पासपोर्ट बनवा रखा था। बाद में सभी ने नाम या पिता के नाम में मामूली हेरफेर करने के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर दूसरा पासपोर्ट भी बनवा लिया। अप्रैल 2025 में पुलिस अधीक्षक देवरिया से की गई गुमनाम शिकायत के बाद इस मामले की जांच की गई तो इस फर्जीवाड़े का पता चला। इसके बाद पुलिस ने सभी के विरुद्ध एकौना थाने में पासपोर्ट अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले की विवेचना अभी लंबित है।

शिकायत होने पर ही उजागर हो पाता है फर्जीवाड़ा का मामला
गोला थाना क्षेत्र के मुन्नीपुर निवासी उमेश यादव पुत्र दूधनाथ यादव ने वर्ष 2016 में पासपोर्ट बनवाया था। इसमें उसकी जन्मतिथि आठ अगस्त, 1988 दर्ज थी। इस पासपोर्ट पर उसने कई बार विदेश यात्रा की। बाद में टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया और वहां अवैध रूप से कारोबार करते हुए पकड़ा गया।

थाईलैंड की पुलिस ने उसे भारत वापस भेज दिया। उसका पासपोर्ट रद कर दिया गया। इसके बाद उसने सुमेश यादव के नाम से दूसरा पासपोर्ट बनवा लिया। इसमें पिता का नाम व पता तो पूर्ववत रहा, लेकिन उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर अपना नाम और जन्मतिथि बदल दी।

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उमेश के दो पासपोर्ट बनवाने की शिकायत गुमनाम व्यक्ति ने एसएसपी को पत्र भेजकर की थी। जांच कराने पर फर्जीवाड़ा की पुष्टि हुई। उस पर 22 मई, 2026 को गोला थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। 2024 से अब तक पासपोर्ट फर्जीवाड़े के करीब-करीब सभी मुकदमे किसी न किसी की शिकायत पर हुई जांच के बाद दर्ज किए गए हैं। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि पासपोर्ट बनने से पहले होने वाली पुलिस की जांच में इस तरह के फर्जीवाड़े सामने नहीं आते।

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फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले और उनके मददगारों को चिन्हित किया जा रही है। साथ ही विदेश भेजने का कार्यालय खोलने वालों का अभियान चलाकर सत्यापन कराया जाएगा। जालसाजी करने वालों के साथ ही पासपोर्ट के आवेदनों पर गलत सत्यापन रिपोर्ट देने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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-डा. एस चनप्पा, डीआइजी रेंज।