गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी। Women Empowerment मां सिद्धिदात्री। आदिशक्ति की पूजा के नौवें दिन हम ज्ञान, बल, बुद्धि के साथ लोक कल्याण की सिद्धि प्रदान करने वाले देवी के स्वरूप की आराधना करते हैैं। मां का यह स्वरूप रोग और भय से मुक्ति प्रदान करने वाला भी माना जाता है। पिछले डेढ़ वर्ष से कोविड संक्रमण से लडऩे वाली महिला चिकित्सक मां के इसी स्वरूप से सदृश लोककल्याण व सेवाकार्य में जुटी हैैं। इनमें से एक हैैं, गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कालेज के एनेस्थीसिया विभाग की रेजीडेंट डाक्टर मिनाली गुप्ता। दूसरी लहर में जब डर पहली लहर से भी अधिक था, कई चिकित्सक छूना तो दूर मरीज को देखने से बच रहे थे, तब डा. मिनाली शांतचित्त होकर लोगों को रोग और भय मुक्त करने में जुटी हुई थीं।

दूसरी लहर में खुद कराई आइसीयू में तैनाती

अप्रैल 2021 से गंभीर हुई कोविड संक्रमण की दूसरी लहर में लोगों के मन में इतना डर था कि हवा में भी वायरस मानकर लोग घरों में बंद थे। संक्रमण तेजी से फैल रहा था। अति गंभीर मरीज भर्ती करने के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज में बने एकमात्र लेवल थ्री कोविड अस्पताल के सभी पांच सौ बेड चंद दिनों में फुल हो गए थे। हर घंटे औसतन एक मौत हो रही थी। कई डाक्टर-कर्मचारी कोविड वार्ड और सघन चिकित्सा कक्ष (आइसीयू) से अपनी ड्यूटी हटवाने में जुटे थे। कम लोग ही अंदर जाने का साहस कर पा रहे थे। ऐसे में डा. मिनाली गुप्ता ने कोविड आइसीयू में दो बार तैनाती करवाई। पहली बार 15 से 30 अप्रैल तक कोविड आइसीयू में ड्यूटी की। इस दौरान करीब 200 मरीजों का इलाज किया।

खुद भी हो गईं संक्रमित, ठीक होकर फिर की ड्यूटी

तीन मई को डा. मिनाली खुद संक्रमित हुईं। उनका आक्सीजन स्तर 82 पर आ गया था जबकि फेफड़े में संक्रमण स्तर 60 फीसद पर पहुंच गया था। उन्हें खुद 28 मई तक आइसीयू में भर्ती रहना पड़ा। डिस्चार्ज होकर कुछ दिन आराम किया, फिर 15 से 30 जून तक कोविड आइसीयू में तैनाती ले ली।

इशारों में मरीजों की बात समझना था जरूरी

मरीजों को समय पर दवा देना, उनसे बात करना, हालचाल पूछना और सबसे प्रमुख बात, इशारे में उनकी जरूरत को समझकर यह अहसास दिलाना कि मैैं समझती हूं, बहुत जरूरी था। यह किया और मैं खुश हूं कि इस परीक्षा में सफल रही। मेरे पति डा. अवनीश ने मेरा मनोबल बढ़ाया।

आत्मबल से इलाज में मदद

दूसरी लहर में संक्रमण के उच्चकाल में तैनाती के दौरान डा. मिनाली ने घर सी देखभाल और स्नेह की खुराक से आइसीयू में भर्ती मरीजों का आत्मबल बढ़ाया। डा. मिनाली कहती हैैं कि दूसरी लहर में लगता था कि पास से गुजरने वाले हर व्यक्ति में संक्रमण है। लोगों का संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना जरूरी था, लेकिन यह भी जरूरी था कि मरीजों में नकारात्मक भाव न आने दिया जाए। आत्मबल बढ़ाया जाए। यह बोध कराया जाए कि वह घरवालों के बीच हैैं। यह मरीजों से दूर रहकर नहीं हो सकता था। मरीजों के घरवाले साथ नहीं थे। कई मरीज ऐसे थे, जो अपने हाथ से दवा तक नहीं खा सकते थे। तब एक डाक्टर के रूप में मैंने बचने नहीं, लडऩे का विकल्प चुना। यही मेरा दायित्व है। इसी के लिए पढ़ाई की है। ट्रेनिंग ली है। संकट की घड़ी में मैैं भाग नहीं सकती।

नवम: मां सिद्धिदात्री

नाम से ही स्पष्ट है, सब कुछ संतानों को देने वाली, समाज को देने वाली। यह स्वरूप ज्ञान व बोध का प्रतीक है। बुद्धि के साथ बल का प्रतीक है। अपने अनुभव, ज्ञान, दर्शन से दिशा प्रदान करने वाली महिलाओं में मां के इस स्वरूप के दर्शन होते हैं।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi