यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
यह है राधा-कृष्ण भक्ति का अलौकिक केंद्र, नाम है गीता वाटिका, Gorakhpur News
भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के उदार व समन्वयवादी दृष्टिकोण के मुताबिक गीता वाटिका परिसर में लगभग सभी प्रचलित व प्रमुख उपास्य विग्रहों की प्रतिष्ठा की गई है।

गोरखपुर, जेएनएन। गोरखपुर शहर की गीता वाटिका आज राधा-कृष्ण भक्ति का अलौकिक राष्ट्रीय केंद्र बन चुकी है। इसकी स्थापना संत भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने की। आज जहां गीता वाटिका है, कभी वह जमीन कोलकाता के सेठ ताराचंद घनश्याम दास की थी। पहले इसे गोयंदका गार्डन के नाम से जाना जाता था। 30 मई, 1933 में वह जमीन गीता वाटिका के लिए खरीदी गई। 1934-35 में वहां भाईजी के रहने के लिए आवास बना। अपने आवास के भूतल में 1945 में उन्होंने कीर्तिदा मैया, राधारानी व ललिताजी की मूर्ति स्थापित की। इसके बाद वहां शुरू हुई भक्ति की धारा आज तक अनवरत रूप से प्रवाहित हो रही है।
1968 से जारी है अखंड हरिनाम संकीर्तन
12 सिंतबर, 1965 में वहां गिरिराज परिक्रमा शुरू हुई और 1968 में भाईजी ने राधाष्टमी के दिन अखंड हरिनाम संकीर्तन की शुरुआत की, जिसका सिलसिला आज भी जारी है। 22 मई, 1971 को भाईजी का महाप्रयाण हुआ। भाईजी की स्मृति में उनकी पत्नी रामदेई पोद्दार ने 13 दिसंबर,1975 को श्रीराधाकृष्ण साधना मंदिर का शिलान्यास किया। मई-जून 1985 में यह बनकर तैयार हो गया। 21 जून, 1985 को मंदिर में देव विग्रहों की स्थापना की गई। गीता वाटिका में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और राधाष्टमी समेत आधा दर्जन से अधिक उत्सव वर्षभर मनाए जाते हैं, जिसमें हिस्सा लेने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। वाटिका में वर्षभर उत्सवानंद का उल्लासपूर्ण प्रवाह बहता रहता है।

गीता वाटिका परिसर में इन विग्रहों की है प्रतिष्ठा
भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के उदार व समन्वयवादी दृष्टिकोण के मुताबिक गीता वाटिका परिसर में लगभग सभी प्रचलित व प्रमुख उपास्य विग्रहों की प्रतिष्ठा की गई है। परिसर में ये विग्रह प्रतिष्ठित हैं-श्रीराधा-कृष्ण, पार्वती-शंकर, रामचटुष्टय, लक्ष्मी-नारायण, भगवान गणेश, दुर्गा, सरस्वती, कार्तिकेय, हनुमानजी, सूर्य नारायण आदि। मंदिर में 16 गर्भगृह और छोटे-बड़े 35 शिखर हैं। प्रधान शिखर 85 फीट ऊंचा है। मंदिर के परिक्रमा पथ पर प्रासादिक ग्रंथ वेद, भागवत, उपनिषद, श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीरामायण, षोडश गीत सुंदर झांकियों के साथ विराजमान हैं।
नागर शैली में हुआ है मंदिर का निर्माण
गीता वाटिका के मंदिर का निर्माण उत्तर भारत की नागर शैली में हुआ है। इसे मंदिर निर्माण के लिए विश्वविख्यात आर्किटेक्ट अहमदाबाद निवासी सीबी सोमपुरा के निर्देशन में तैयार किया गया है। मंदिर के भूतल में एक सभागार है, जिसमें समय-समय पर विविध आयोजन होते रहते हैं। सभागार के पीछे हनुमान प्रसाद पोद्दार प्रा'य शोध संस्थान व ग्रंथालय स्थापित है। वाटिका परिसर में एक गोशाला भी है, जिसमें गोवंश की विधिवत सेवा की जाती है।