दुर्गेश त्रिपाठी, गोरखपुर। नरेंद्र प्रसाद को हफ्ते में तीन दिन डायलिसिस करानी पड़ती थी। वह जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में भर्ती होते थे और चार घंटे की प्रक्रिया संगीत की धुनों के बीच कब पूरी हो जाती, नरेंद्र प्रसाद को पता ही नहीं चलता। संगीत की धुनों से न सिर्फ नरेंद्र प्रसाद को मानसिक शांति मिलती है वरन डायलिसिस की लंबी प्रक्रिया का दर्द भी छू मंतर हो जाता है। कहते हैं कि संगीत के बीच डायलिसिस से आत्मविश्वास भी बढऩे लगा है। अब हफ्ते में दो दिन ही डायलिसिस करा रहा हूं।

पीपीपी के तहत खुला है सेंटर

जिला अस्पताल परिसर में पिछले साल नवंबर में खुले हीमोडायलिसिस यूनिट में म्यूजिक का जादू मरीजों का दर्द कम कर देता है। उत्तर प्रदेश सरकार और हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड वाराणसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत इस सेंटर को खोला गया है।

हर महीने 60 मरीजों की डायलिसिस

हीमोडायलिसिस यूनिट में हर महीने 60 मरीजों का डायलिसिस होता है। दरअसल, एक मरीज को सप्ताह में तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। सेंटर इसके लिए पूरा शेड्यूल बनाता है। मरीज की सहूलियत के हिसाब से समय निर्धारित किया जाता है।

चार घंटे में होती है डायलिसिस

एक मरीज के डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। सेंटर में सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक, दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक और शाम छह बजे से रात 10 बजे तक डायलिसिस का शिफ्ट निर्धारित किया गया है।

तीन बेड बढ़ाने की चल रही कवायद

डायलिसिस यूनिट में तीन बेड और बढ़ाने की कवायद चल रही है। अभी यहां 10 बेड हैं। तीन ेबेड बढऩे के बाद हर महीने 18 और मरीजों की डायलिसिस संभव हो जाएगी। सेंटर हेड अरुण यादव कहते हैं कि सेंटर में तीन बेड और बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए प्रमुख अधीक्षक को प्रस्ताव दे दिया गया है।

जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजकुमार गुप्ता ने कहा कि हीमोडायलिसिस यूनिट अच्छे से संचालित हो रही है। बेड बढ़ाने के पहले टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। यदि संभावना दिखेगी तो शासन से अनुमति ली जाएगी।

ऐसे होते हैं भर्ती

हीमोडायलिसिस यूनिट में डायलिसिस कराने के लिए पहले मरीज को जिला अस्पताल की ओपीडी में एक रुपये का पर्चा लेकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद नोडल अफसर फिजीशियन डॉ. बीके सुमन को मरीज दिखाना होता है। डॉ. सुमन जरूरी जांच कराते हैं। जांच में डायलिसिस की आवश्यकता की पुष्टि होने के बाद मरीज को भर्ती होने का नंबर दिया जाता है।

फैक्ट फाइल

  • बेड- 10
  • कुल मरीज- 60
  • वेटिंग में मरीज- 110

शोध में यह साबित हो चुका है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के मामले में संगीता चिकित्सा के नतीजे बहुत अच्छे आते हैं। संगीत के बीच इलाज से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे तनाव देने वाले हार्मोन का स्राव कम होता है। मरीज खुद को तरोताजा महसूस करता है। संगीत सुनने से शरीर में रक्तप्रवाह सामान्य रहता है। इससे बीमारी जल्द काबू करने में मदद मिलती है। - डॉ. अखिलेश सिंह, वरिष्ठ फिजीशियन

Posted By: Pradeep Srivastava

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