गोरखपुर, जेएनएन। स्मार्ट फोन अब संचार और मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि स्वावलंबन का जरिया भी बन गया है। खासकर उन महिलाओं के लिए जो घरेलू कामकाज के दबाव में चाहकर भी घर की दहलीज पार नहीं कर पाती थीं। स्वावलंबन की उनकी चाहत दिल में ही दबी रह जाती थी। ऐसी महिलाओं को अब घर से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही। स्मार्ट फोन के जरिये अब वह घर बैठे ही ऑनलाइन दुकान चला रही हैं। इससे वह न केवल घर की आमदनी बढ़ा ही रही हैं बल्कि स्वावलंबन से अपनी नई पहचान भी बना रही हैं। गोरखपुर में बीते एक-दो वर्षों में यह ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ा है।

कामकाजी महिलाएं पीछे नहीं

आम हो या खास हर कोई किसी न किसी रूप में इंटरनेट से जुड़ा है। स्मार्ट फोन ने इस जुड़ाव की राह आसान की है। इस जुड़ाव का सिलसिला अब तो इतना आगे बढ़ गया कि लोग इसे रोजगार का माध्यम बनाने लगे हैं। पुरुष तो इसका फायदा उठा ही रहे हैं, कामकाजी महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं हैं। बीते डेढ़-दो वर्षों में उनमें ऑनलाइन ट्रेडिंग का प्रचलन बढ़ा है। मतलब वह घर बैठे ही स्मार्ट फोन के जरिए ऑनलाइन दुकान चला रही हैं। ऑनलाइन दुकान, एकबारगी सुनने में यह अजीब लग सकता है पर स्मार्ट फोन के माध्यम से खुली ये दुकानें आज के दौर की हकीकत है।

महिलाओं की बढ़ती जा रही दिलचस्‍पी

घर बैठे सामान बेचने व खरीदने की सुविधा के चलते ऑनलाइन दुकानदारी में महिलाओं की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। खुद को अपडेट करते हुए वह दोस्तों, परिचितों को मिलाकर फेसबुक पेज व वाट्सएप गु्रप बना रही हैं। कपड़े, बैग, जूते व अन्य उपयोग की चीजें बनाने वाली कंपनियों से संपर्क साधकर सुविधानुसार सामान मंगवा रही हैं। फिर खुल जा रही है ऑनलाइन दुकान। बातचीत में इसके फायदे बताते हुए महिलाओं ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त समय नहीं निकालना पड़ता न ही अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ती है। बस थोड़ी-थोड़ी देर पर फोन चेक करते हुए सामान का आर्डर व डिलीवरी सुनिश्चित करनी होती है। सामान की क्वालिटी एवं तय समय के भीतर डिलीवरी ही ऑनलाइन दुकानदारी की सफलता की कसौटी है।

हर जगह है ऑनलाइन ट्रेडिंग का क्रेज

ऑनलाइन ट्रेडिंग का दायरा केवल शहर तक ही सीमित नहीं है। कस्बा हो या गांव, हर जगह लोगों में इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। बड़ी कंपनियों से लेकर छोटे व्यवसायी सभी अपने उत्पादों के लिए इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं। वह ऑफिशियल, इंस्टाग्राम, फेसबुक पेज, वाट्सएप ग्रुप आदि के जरिये ग्राहकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। महिलाएं भी इसी में अपने लिए विकल्प तलाश कर ऑनलाइन व्यवसाय की शुरुआत कर रही हैं। बहुत सी महिलाओं ने तो इसमें महारत हासिल कर ली है और अ'छी आमदनी कर रहीं हैं।

बिना पूंजी के शुरू किया काम

प्रीति सिन्हा हमेशा से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं परंतु छोटे बच्‍चों की जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए समय निकालना मुश्किल था। एक दिन मोबाइल पर कंपनी का विज्ञापन देखा, जिसमें उत्पाद की विशेषता बताई गई थी। साथ ही उससे जुडऩे का लिंक दिया था। बस फिर क्या था, प्रीती कंपनी से जुड़ गईं। वाट्सएप ग्रुप बनाकर कंपनी के प्रोडक्टस पोस्ट किए। चीजें पसंद आने पर लोगों ने खरीदारी की। आमदनी सीधे खाते में। एक साल में प्रीती की कमाई पांच-छह हजार प्रतिमाह पंहुच चुकी है।

आत्मनिर्भर बनकर मिलती है खुशी

राजेंद्रनगर की शालिनी त्रिपाठी पिछले चार साल से ऑनलाइन सेलिंग का काम कर रहीं हैं। देवरिया अपनी ससुराल जाने पर गांव की महिलाओं को सिलाई-बुनाई करते हुए देखतीं। उत्सुकतावश कुछ चीजों के फोटो खींचकर वाट्सएप पर दोस्तों को भेज दिया। जवाब में लोगों ने उनके दाम पूछे। यहीं से उनके दिमाग में ऑनलाइन काम करने का आइडिया आया, फिर कुछ बुटीक व होलसेल करने वालों से मिलीं। काम चल निकला। कमाई की बाबत पूछने पर वह कहती हैं कि महीने में आठ से दस हजार कमा लेती हूं।

श्‍वेता सिंह ने ऐसे शुरू किया काम

हुमायूंपुर में रहने वाली श्वेता सिंह कहती हैं कि घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों में ऐसी व्यस्त हो गई कि जब तक बहुत जरूरी न हो घर से निकल नहीं पाती। झुंझलाहट होने लगी थी, इतने में सहेली ने ऑनलाइन काम करने की सलाह दी। बात जंच गई। घर संभालने के साथ कमा भी सकती हूं। अभी हाल में ही ऑनलाइन काम शुरू किया है। अनुभव की कमी भले ही है पर उत्साह बहुत है। इस काम को शुरू करने में अधिक धनराशि की जरूरत नहीं है। घाटे की संभावना भी नहीं रहती। नवीनतम फैशन की जानकारी भी होती रहती है।

इनके पास कॉस्मेटिक्स से रसोई तक के सामान

कुड़ाघाट की रीना श्रीवास्तव बताती हैं कि मुझे ऑनलाइन शॉपिंग करना बहुत पसंद है तो खरीदते-खरीदते बेचने के बारे में भी जानकारी करके खुद की ऑनलाइन दुकान खोल ली। अब चार साल हो गए हैं। कॉस्मेटिक्स से शुरू करके रसोई तक के सामान बेचती हूं। मेरी बेटियों को भी इसमें बहुत मजा आता है। दोनों नई-नई चीजों के बारे में बताती रहती हैं। रीना कहती हैं कि इस काम में ग्राहकों पर अपना विश्वास जमाना होता है। यदि वह आप के भेजे सामानों से संतुष्ट होगा तो बार-बार आपसे सामान खरीदेगा।

ये भी कर रहीं तैयारी

बशारतपुर की शालिनी सिंह को नई-नई चीजों के बारे में जानने का बहुत शौक है। वह भी ऑनलाइन कपड़ों की दुकान खोलने का मन बना रही हैं। शालिनी कहती हैं कि यह इंटरनेट का युग है। लोगों के पास समय का अभाव है। हर काम ऑनलाइन हो रहा है। बिजली का बिल जमा करना हो या कोई टिकट निकलवाना हो, सभी को तकनीकी रूप से सक्षम होना पड़ेगा। तभी हम जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।

ये आत्‍मनिर्भर होने का अवसर

अलहदादपुर की दिव्या मिश्रा मोबाइल पर नई-नई चीजें सर्च करती रहती हैं। वह कहती हैं कि बाजार में क्या कुछ नया आया है,इसके लिए अब दुकानों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। ऑनलाइन दुकान से घर बैठे नवीनतम फैशन के बारे में जानकारी मिलती रहती है। मेरी कई सहेलियां इससे कमाई कर रहीं हैं। मैं भी मन बना रही हूं। मोबाइल सिर्फ बात करने और गाना सुनने के लिए नहीं है। ये हमें आत्मनिर्भर होने का अवसर भी देता है। 

Posted By: Satish Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस