गोरखपुर, (जेएनएन)। जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाकर जान देने की कोशिश करने वाले शोधार्थी दीपक कुमार की हालत में सुधार है, हालांकि मामले को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर का माहौल खराब होता जा रहा है। शोधार्थी द्वारा डीन और विभागाध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों के मद्देनजर एक ओर जहां आरोपित शिक्षकों ने पूरे मामले को विभागीय राजनीति का रंग दिया है, वहीं शोधार्थी के उत्पीड़न से क्षुब्ध होकर छात्रों के एक समूह ने आरोपित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। कुलपति ने जहां विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया वहीं मामला पुलिस तक भी पहुंच चुका है।
विश्वविद्यालय परिसर में भले ही अवकाश चल रहा है लेकिन प्रकरण को लेकर संबंधित लोगों के बीच माहौल गरम है। गुरुवार दोपहर बाद से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती शोधार्थी दीपक कुमार की हालत में सुधार के बाद शुक्रवार को दोपहर बाद उसे डिस्चार्ज करने का निर्णय किया गया। हालांकि बिस्तर से उठते ही उसने सिर में चक्कर व पेट में तेज दर्द की शिकायत की। दीपक की हालत को देखते हुए उसे फिर से भर्ती कर लिया गया। पहले 24 घटे से वह वार्ड-14 में भर्ती था, जबकि शुक्रवार को उसे वार्ड-9 में शिफ्ट कर दिया गया। दोपहर में मुख्य नियंता प्रो. गोपाल प्रसाद अपनी पत्‍‌नी के साथ उसकी कुशल क्षेम पूछने पहुंचे।
उन्होंने बताया कि उसकी तबियत में सुधार हो रहा है, हालांकि उसे मानसिक रूप से स्वस्थ होने में अभी समय लगेगा। दीपक का परिवार पहुंचा : दीपक के पिता झगहा क्षेत्र के राघोपट्टी पड़री निवासी जगदीश प्रसाद, मा, भाई व बहन गुरुवार की देर रात घटना की जानकारी पाकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। दीपक ने पिता से सुबह बात की और घटना के बारे में बताया। यह भी बताया कि आत्महत्या की कोशिश से पहले उसने सुसाइड नोट में सारी बातें लिख दी हैं। बेटे द्वारा लिखी गई चिट्ठियों के आधार पर पिता ने पुलिस को तहरीर दी।
मामले को चढ़ रहा राजनीति का रंग
दीपक द्वारा लगाए गए आरोपों पर दोनों वरिष्ठ शिक्षकों ने राजनीति से प्रेरित बताया है। अपनी सफाई देते हुए प्रो. सीपी श्रीवास्तव और प्रो. द्वारिका नाथ ने पूरे प्रकरण को विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. डीएन यादव द्वारा रची हुई साजिश करार दिया है। आरोपित शिक्षकों का कहना है कि दीपक, प्रो. डीएन यादव द्वारा गुमराह किया जा रहा है, जबकि प्रो. डीएन यादव, अपने बेटे पर हुई कार्रवाइयों का प्रतिशोध लेने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि प्रो. डीएन यादव के पुत्र मनोज कुमार यादव की जेआरएफ फेलोशिप के फर्जीवाड़े का मामला खासा चर्चित रहा है, जिसमें बतौर अध्यक्ष प्रो. सीपी श्रीवास्तव ने कार्रवाई की थी। कुलपति ने गुरुवार को ही विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया था वहीं शुक्रवार को सुरेंद्र भारती, भास्कर चौधरी, अन्नू प्रसाद, अमित सिंघानिया, सोनू सिद्धार्थ, सुरेंद्र वाल्मीकि, मंजेश सुधीराम, सचिन आदि छात्रों ने दीपक के साथ हुई घटना पर दुख जाहिर करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि दोनों संबंधित आरोपित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न हुई तो 24 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
शोधार्थियों के एक समूह ने कुलपति को किया था आगाह
दर्शनशास्त्र विभाग में जातिगत आधार पर विवाद को लेकर शोधार्थियों के एक समूह ने कुलपति को आगाह किया था। 18 सितंबर को कुलपति को मिले पत्र में कुछ शोधार्थियों ने कहा था कि विभाग में दो गुट हैं। एक गुट से संबंधित लोग दूसरे समूह के लोगों को छोटी-छोटी बातों पर भी एससी-एसटी एक्ट के तहत फंसाने की धमकी देते हैं। पिछले दिनों में ऐसी घटनाएं हुई भी हैं।

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