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गोरखपुर जागरण फिल्म फेस्टिवल में बोले रवि किशन, 'समय होत बलवान... इंतजार किया, 34 साल बाद आया समय'

Published: Sat, 26 Sep 2026 10:41 AM (IST)

रवि किशन ने जागरण फिल्म फेस्टिवल में अपने 34 साल के फिल्मी संघर्ष की कहानी साझा की, बताया कि कैसे ...और पढ़ें

सांसद व अभिनेता सांसद रवि किशन को सुनते जागरण फिल्म फेस्टिवल में उपस्थित दर्शक। जागरण

सांसद व अभिनेता सांसद रवि किशन को सुनते जागरण फिल्म फेस्टिवल में उपस्थित दर्शक। जागरण

HighLights

  1. रवि किशन ने जागरण फिल्म फेस्टिवल में 34 साल के संघर्ष की कहानी सुनाई।

  2. अभिनय के लिए किरदारों को जीना होता है, रवि किशन ने बताया।

  3. कमजोर लेखन को गालियों से भरने की कोशिश पर रवि किशन ने कहा।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सिनेमा के पर्दे पर कभी माफिया, कभी पुलिस अधिकारी तो कभी हास्य किरदार में दिखने वाले रवि किशन शुक्रवार को जागरण फिल्म फेस्टिवल के मंच पर अपने मूल अंदाज में नजर आए। उद्घाटन सत्र में आरजे प्रीति के साथ उनकी बातचीत सवाल-जवाब से कहीं आगे बढ़कर किस्सों, ठहाकों, संघर्ष, अभिनय और जिंदगी की अनकही परतों का सफर बन गई। दर्शकों से सीधे संवाद ने माहौल को और जीवंत कर दिया।

अपने संघर्ष की कहानी सुनाते हुए रवि किशन ने कहा कि वह फिल्मी दुनिया में चलकर नहीं बल्कि रेंगकर पहुंचे। रामलीला में सीता का किरदार निभाने से शुरू हुआ सफर मुंबई की गलियों तक पहुंचा। लगातार संघर्ष किया। ''''समय होत बलवान'''' वाली कहावत का जिक्र करते हुए उन्होंने वर्तमान में चमक रहे अपने करिअर पर प्रकाश डाला। बोले- अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे कलाकार 90 के दशक में साथ निकले और आगे बढ़ गए। मुझे लाइन में इंतजार करना था। मेरा इंतजार 34 साल लंबा हो गया, लेकिन समय आया।

उन्होंने बताया कि कलाकार के लिए किरदार सिर्फ निभाना नहीं, उसे जीना होता है। इसी वजह से कभी धूप, कभी बर्फ, कभी पानी और कृत्रिम बारिश में शूटिंग करनी पड़ती है। उन्होंने पिता और गुरु पंडित श्याम नारायण शुक्ल के निधन का प्रसंग सुनाया तो दर्शक भावुक हो गए।

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मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान भीड़ द्वारा उन्हें पहचानकर वीडियो बनाने की घटना को याद करते हुए रवि किशन ने कहा कि कलाकार के भीतर उस समय दो जीवन चल रहे थे।

रवि किशन ने अपने अभिनय की खासियत भी बताई। कहा कि वह दूसरे कलाकारों की फिल्में देखकर किरदार तैयार करने से बचते हैं। कहा कि मेरी फ्लापी में पहले से अनगिनत किरदार भरे हैं। मैं गांव, चट्टी, चौराहे और बाजार में लोगों को देखता हूं। कोई चेहरा, चाल या अंदाज पसंद आ जाए तो वह जेहन में उतर जाता है और मौका आने पर पर्दे पर जाग उठता है। सांसद ने ‘लापता लेडीज’ के इंस्पेक्टर मनोहर के लिए 160 पान खाने का रोचक किस्सा भी सुनाया।

गालियों से कमजोर लेखन को भरने की होती कोशिश
दर्शकों के सवालों पर भी रवि किशन ने खूब रंग जमाया। 77 वर्षीय रंगकर्मी सतीश चंद्र श्रीवास्तव के मुंबई जाकर संघर्ष करने के सवाल पर सांसद बोले- सिनेमा महादेव चाहेंगे तो आपके पास गोरखपुर में चलकर आएगा।

वेब सीरीज में गालियों के सवाल पर कहा कि कमजोर लेखन को गालियों से भरने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने सिनेमा को समाज का आईना बताते हुए कहा कि तीन घंटे की फिल्म वह बात पूरे देश तक पहुंचा सकती है, जिसे कहने में वर्षों लग सकते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने अध्यात्म, ध्यान और मंत्रजाप को कलाकार के लिए जरूरी बताया।

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मुझमें खुद को पाता है जेन-जी
जेन-जी में अपनी लोकप्रियता पर सांसद ने कहा कि उनकी गलतियां और सहजता युवाओं को अपने जैसी लगती है। वह मुझमें खुद को देखते हैं। प्रसारित हुए ‘कोटेश्वराय’ भजन का किस्सा भी सुनाया। कहा कि बंगाल चुनाव के दौरान होटल की लाबी में एक युवा गायक के साथ गाया भजन देशभर में लोकप्रिय हो गया।

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