गोरखपुर में जागरण फिल्म फेस्टिवल का आगाज: रवि किशन ने किया उद्घाटन, 'इक्कीस' और 'धनक' समेत दिखाई जाएंगी ये मूवीज
गोरखपुर में दैनिक जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का आगाज हो गया है, जिसका उद्घाटन सांसद व अभिनेता रवि किशन ने किया।

जागरण फिल्म फेस्टिवल का रवि किशन ने किया उद्घाटन।
HighLights
गोरखपुर में जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का हुआ शुभारंभ।
सांसद व अभिनेता रवि किशन ने किया महोत्सव का उद्घाटन।
तीन दिवसीय महोत्सव में दिखेंगी विविध भाषाओं की फिल्में।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरक्षनगरी शुक्रवार को सिनेमा के रंग में रंग गई। दैनिक जागरण की ओर से सिटी माल स्थित आइनाक्स में जागरण फिल्म फेस्टिवल-2026 का आगाज हुआ। तीन दिन चलने वाले इस सिनेमा उत्सव में अलग-अलग भाषाओं और शैलियों की फीचर फिल्में, वृत्तचित्र और लघु फिल्में दर्शकों को देखने को मिलेंगी।
उद्घाटन समारोह में सांसद व अभिनेता रवि किशन आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने दैनिक जागरण के संस्थापक पूर्णचंद गुप्त, पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन, पूर्व उद्घाटन चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्त और मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया।
उसके बाद संवाद सत्र में अपनी बेबाक शैली में उन्होंने सिनेमा से जुड़े अनुभव साझा किए तो दर्शकों से भी खूब संवाद किया। उनकी बातों और अंदाज ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। फिल्मों के प्रदर्शन की शुरुआत 'शिकायतें' से हुई।

चार कहानियों के जरिये रिश्तों, हास्य और रोजमर्रा की जिंदगी में छिपी खुशियों को पर्दे पर उतारा गया। इसके बाद 'ग्रीष्मांत' दिखाई गई। सागर मशालकर निर्देशित यह फिल्म कथक कलाकार के संघर्ष को सामने लाती है, जो त्वचा संबंधी बीमारी के बीच कला, रिश्तों और सामाजिक स्वीकार्यता के सवालों से जूझता है। अंतिम फिल्म 'वान्या' रही।
बदिगेर देवेंद्र निर्देशित फिल्म छोटे मछुआरा समुदाय की पीढ़ियों पुरानी जीवनशैली पर बदलती नीतियों और आर्थिक परिस्थितियों के प्रभाव की कहानी कहती है।

उद्घाटन अवसर पर दैनिक जागरण के महाप्रबंधक डॉ. सुशील कुमार मिश्रा, संपादकीय प्रभारी भास्कर सिंह, विज्ञापन प्रबंधक एलके झा और प्रसार प्रबंधक अविनाश कुमार मौजूद रहे।
महोत्सव में दिखाई जाने वाली फिल्में
धनक : निर्देशक नागेश कुकुनूर। कलाकार हेतल गाडा, कृष छाबड़िया, विपिन शर्मा, गुलफाम खान, विभा छिब्बर व विजय मौर्य।
इकोज आन द वाल : निर्देशक निलेश अरुण कुंजिर। फिल्म भारतीय दीवार कला और उसके कलाकारों की दुनिया को दिखाती है और कला को संस्कृति, स्मृति, पहचान और जीवन का माध्यम बताती है।
बोध : निर्देशक प्रशांत रंजन। कलाकार नीरज कृष्ण, गरिमा मिश्रा, शुभम दुबे व कुणाल रंजन। भौतिकी के प्रोफेसर की आत्ममंथन यात्रा के जरिए फिल्म मानवीय रिश्तों के महत्व को रेखांकित करती है।
सांग्स आफ द मिस्ट : निर्देशक रवि कुमार। ग्रामीण लोकनर्तक सुरेश अपनी पारंपरिक प्रस्तुति और पत्नी की असहमति के बीच संघर्ष करता है।
थ्रू योर आइज : निर्देशक नेल्सन येओ। कलाकार लिम पोह हुआट, डोरेन टो, टैन शिन येन व एडवर्ड टैन। 1980 के दशक की डिस्को संस्कृति की पृष्ठभूमि में चार लोगों के जीवन और जुड़ाव की तलाश को दिखाया गया है।
अंतरद्वंद्व : निर्देशक सचिन कौशिक। फिल्म ओसीडी से जूझ रहे व्यक्ति के भीतर चल रहे भय, संदेह और मानसिक संघर्ष की संवेदनशील कहानी है।
इक्कीस : निर्देशक श्रीराम राघवन। फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म। 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि।
मालिपुट मेलोडीज : निर्देशक विशाल पटनायक। ओडिशा के ग्रामीण जीवन की छोटी-छोटी खुशियों और बदलते सामाजिक परिवेश से प्रभावित होती जिंदगी की कहानियां फिल्म में हैं।
