गोरखपुर, जेएनएन। रेल ई-टिकट दलालों का कारोबार देवरिया से दिल्ली, मुम्बई तक फैला हुआ है। यह पूरा कारोबार वाट्सएप के जरिये संचालित हो रहा है। साथ ही इन टिकटों का भुगतान भी टिकट दलाल आनलाइन ही कर रहे हैं। एक टिकट पर पांच से एक हजार रुपये तक की वसूली टिकट दलाल कर रहे हैं। इसका पर्दाफाश हाल ही में हुआ। इस तरह के पांच मामले सीआइबी की टीम ने पकड़े हैं।

दीपावली, छठ पर्व संपन्न होने के साथ ही लगन भी शुरू हो गया है। बाहर कमा रहे लोग अपने घर आए हैं, अब जाने का समय हो गया है। लंबी दूरी की ट्रेनों का चार माह आगे तक का सीट फुल है। लोगों के सामने तत्काल का टिकट ही सहारा है। तत्काल टिकट के लिए भी मारामारी हो रही है। जिसके चलते लोग दलालों के चंगुल में फंस जा रहे हैं। अधिक कीमत चुकता कर टिकट ले रहे हैं।

ऐसे काम कर रहा है टिकट दलालों का रैकेट

टिकट दलालों का रैकेट कई प्रदेशों में फैला है। इनका एक वाट्सएप ग्रुप है, जिनसे टिकट दलाल जुड़े हैं। अगर कोई टिकट बनवाने के लिए उनके पास आता है तो ग्रुप के किसी टिकट दलाल से संपर्क करते हैं और ई-टिकट उपलब्ध करा देते हैं। टिकट वाट्सएप आ जाता है जबकि उसका भुगतान पेटीएम या अन्य आन-लाइन सिस्टम से करते हैं।

चार-चार माह पहले ही टिकट करा चुके हैं बुक

यह टिकट दलाल फर्जी नामों से चार माह पहले ही टिकट बुक करा चुके हैं, जब उनके पास कोई टिकट लेने आता है तो उस नाम का यह फर्जी आइडी बनाकर उसे टिकट उपलब्ध करा देते हैं।

हाल के दिनों में इस तरह के दलालों पर कार्रवाई की गई है। कुछ और लोगों की तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - संजय राय, सीआइबी प्रभारी, भटनी

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