गोरखपुर, जेएनएन। परिषदीय स्कूलों के बच्‍चे कोरोना के कारण भले ही बिना पढ़े प्रोन्नत होकर अगली कक्षा में पहुंच गए हैं, लेकिन अभी भी पढ़ाई में कच्‍चे हैं। स्कूल बंद होने के कारण ब'चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसको देखते हुए कुछ शिक्षकों ने ब'चों को आनलाइन पढ़ाना तो शुरू कर दिया है, पर पढऩे में कमजोर होने के कारण उन्हें बच्‍चों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है। पिछले साल की तरह इस बार भी शासन के निर्देश पर जिले में कक्षा एक से आठ तक के साढ़े तीन लाख ब'चे प्रोन्नत होकर अगली कक्षा में पहुंच गए हैं।

एक माह भी नहीं चल पाए थे स्‍कूल

कोरोना के कारण एक साल तक बंद रहने के बाद स्कूल मार्च में खुले थे। अभी स्कूल केवल 15 से 20 दिन तक ही चले थे कि अचानक 24 मार्च से एक बार फिर स्कूलों को कोरोना के कारण बंद करना पड़ा। शिक्षक बच्‍चों को पिछली कक्षा के प्रमुख विषय पढ़ा रहे थे ताकि अप्रैल में नया सत्र शुरू होने पर उन्हें अगली कक्षा के दौरान पढ़ाने वाले पाठ्यक्रम आसानी से समझ आ सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और एक बार फिर बच्‍चों की पढ़ाई पर कोरोना का साया पड़ गया। इस प्रकार फिर बच्‍चे पिछले साल की तरह पढ़ाई से दूर हो गए।

इस बार आनलाइन शुरू हुआ सत्र

कोरोना के कारण पठन-पाठन से लेकर हर चीज में बदलाव हुआ है। स्कूलों में भी पहली बार नए सत्र की शुरुआत आनलाइन कक्षाओं से हुई है। ब'चों की पढ़ाई चलती रहे इसके मद्देनजर सरकारी व निजी स्कूलों ने पहली अप्रैल से आनलाइन कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया है। हालांकि परिषदीय स्कूलों में अभी महज 20 से 25 फीसद ब'चे ही इससे जुड़े हैं। शिक्षकों ने पढ़ाई शुरू कर दी है, लेकिन बिना पढ़े अगली कक्षा में प्रोन्नत होकर पहुंचे छात्रों की समझ में उनकी पढ़ाई बातें कम ही समझ में आ रही है।

पढ़ाई में करनी पढ़ रही मशक्‍कत

शिक्षिका अनीता श्रीवास्तव का कहना है कि मार्च में स्कूल खुलने के बाद अभी बच्‍चों को प्रमुख विषय पढ़ाना ही शुरू किया गया था कि फिर से स्कूल बंद हो गए। कोरोना के कारण भले ही बच्‍चों को प्रोन्नत कर दिया गया है, लेकिन इससे वह पढ़ाई में कमजोर हो गए हैं और उन्हें पढ़ाई में हमें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। शिक्षक आशुतोष सिंह का कहना है कि कक्षा एक से आठ तक ब'चों का नया सत्र इस वर्ष पहली बार आनलाइन शुरू हुआ है। अधूरा ज्ञान होने के कारण प्रोन्नत हुए ब'चों को पढ़ाने में हमें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें हमें सब कुझ समझा सकें।

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