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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में नौ घंटे धरने पर बैठे रहे प्री-पीएचडी विद्यार्थी, तब जाकर मानी गई मांग

By Navneet Prakash TripathiEdited By:
Published: Tue, 23 Nov 2021 02:06 PM (IST)Updated: Tue, 23 Nov 2021 05:33 PM (IST)

पुरानी परिनियमावली के अनुसार परीक्षा कराने परीक्षा की तिथि घोषित करने और फेल होने पर दोबारा परीक्षा कार्यक्रम जारी करने ...और पढ़ें

गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में नौ घंटे धरने पर बैठे रहे प्री-पीएचडी विद्यार्थी। प्रतीकात्‍मक फोटो
गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में नौ घंटे धरने पर बैठे रहे प्री-पीएचडी विद्यार्थी। प्रतीकात्‍मक फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। पुरानी परिनियमावली के अनुसार परीक्षा कराने, परीक्षा की तिथि घोषित करने और फेल होने पर दोबारा परीक्षा कार्यक्रम जारी करने की मांग को लेकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सत्र 2019-20 के प्री-पीएचडी विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन पर धरना दिया। 22 नवंबर को सुबह से प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल से शुरू हुआ धरना कुल नौ घंटे चला और रात आठ बजे तब समाप्त हुआ, जब अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह और परीक्षा नियंत्रक ने उनकी मांंगे मान ली और पांच दिसंबर तक परीक्षा की तिथि घोषित करने का आश्वासन दिया।

16 नवंबर को भी धरने परबैठे थे प्री-पीएचडी के छात्र

प्री-पीएचडी विद्यार्थी इसके पहले 16 नवंबर को भी धरने पर बैठे थे। देर रात तक चले धरने में प्रशासनिक अधिकारियों ने दो दिन में मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया था। समय सीमा बीतने के बाद भी जब मांगों के पूरा होने को लेकर कोई घोषणा नहीं की तो विद्यार्थियों में आक्रोश बढ़ गया। हालांकि इसी बीच विवि प्रशासन की ओर से एक विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें वर्ष 2018-अध्यादेश के मुताबिक परीक्षा की बात कही गई लेकिन पब्लिकेशन एथिक्स विषय जोड़ देने से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की मंशा पर शंका होने लगी।

धरने के समय विभागाध्‍यक्षों की चल रही थी बैठक

नाराज विद्यार्थी सोमवार को एक बार फिर प्रशासनिक भवन पर जुटे और सुबह 11 बजे कमेटी हाल के दरवाजे पर धरने पर बैठ गए। उस समय हाल में विभागाध्यक्षों और संकायाध्यक्षों की बैठक चल रही थी। बैठक में कुलपति नहीं पहुंचे तो नाराज छात्रों ने प्रशासनिक भवन के गेट में ताला जड़ दिया। आधे घंटे तक शिक्षक व कर्मचारी फंसे रहे। काफी समझाने के बाद अधिकारियों ने ताला खुलवाकर सभी को भवन से बाहर कराया। धरना देने वालोंं में मंदीप राय, कमलकांत राव, अंजली, दीप्ति राय, राजन दुबे, लोकप्रिय पांडेय, अभिषेक तिवारी, प्रशांत, कृष्णा कुमार, सोनू, कृतिका, पवन आदि शामिल रहे।

इन आश्वासनों के बाद माने विद्यार्थी

अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह, प्रो. विनय सिंह और परीक्षा नियंत्रक डा. अमरेंद्र कुमार सिंह धरने पर बैठे विद्यार्थियों के पास तीन बार पहुंचे। हर बार यह समझाने की कोशिश की कि परीक्षा-2018 के अध्यादेश के अनुसार होगी, जिसमें दो प्रश्न पत्र रिसर्च मेथाडोलॉजी और कंप्यूटर एप्लीकेशन ही होंगे। पाठ्यक्रम से पब्लिकेशन एथिक्स को हटा दिया गया है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मंगलवार से परीक्षा फार्म भरवाना शुरू कर दिया जाएगा। फार्म चार दिसंबर तक भरा जा सकेगा। परीक्षा तिथि पांच दिसंबर से पहले घोषित कर दी जाएगी। परीक्षा 20 से 24 दिसंबर के बीच में होगी।