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विधायक से मिले बिजलीकर्मी, ईपीएफ व ईएसआइ में हुए घोटाले की कराई जाए जांच

उप्र पावर कारपोरेशन निविदा-संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में कर्मी खलीलाबाद के विधायक दिग्विजय नारायण चतु्र्वेदी उर्फ जय चौबे से मिले। राजकीय औद्योगिक आस्थान-खलीलाबाद स्थित विधायक के कार्यालय पर पहुंचे कर्मियों ने उन्हें सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

By Rahul SrivastavaEdited By: Published: Wed, 06 Oct 2021 07:09 PM (IST)Updated: Wed, 06 Oct 2021 07:09 PM (IST)
खलीलाबाद सदर विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चतुर्वेदी को ज्ञापन देते विद्युत संविदा कर्मी। जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता : उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा-संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में कर्मी खलीलाबाद के विधायक दिग्विजय नारायण चतु्र्वेदी उर्फ जय चौबे से मिले। राजकीय औद्योगिक आस्थान-खलीलाबाद स्थित विधायक के कार्यालय पर पहुंचे कर्मियों ने उन्हें सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस पर विधायक ने उचित पहल किए जाने का आश्वासन दिया।

18 हजार रुपये मानदेय के साथ दिया जाए हित लाभ

संगठन के जिलाध्यक्ष अमित सिंह ने कहा कि आउटसोर्सिंग के जरिए कार्य करने वाले कर्मियों को न्यूनतम 18 हजार रुपये मानदेय के साथ अन्य हितलाभ दिया जाए। समायोजित कर इन कर्मियों को समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। ईपीएफ व ईएसआइ में हुए घोटाले की जांच कराई जाए। घटना-दुर्घटना होने पर उपचार की सुविधा के साथ ही उन्हें इलाज की अवधि तक वेतन दिया जाए।

कर्मी के मृत्यु पर दस लाख व परिवार के सदस्य को दी जाए नौकरी

दुर्घटना हित लाभ योजना के तहत कर्मी के मृत्यु होने पर दस लाख रुपये तथा परिवार के एक सदस्य को विभाग की सेवा में लिया जाए। कर्मियों को पोशाक व मोबाइल भत्ता लाभ दिया जाए। कर्मियों को हटाने व स्थानांतरण के नाम पर की जा रही धनउगाही की जांच कराई जाए। विधायक से मिलने वालों में मो. अकरम, योगेंद्र सिंह, संतोष कुमार मिश्र, प्रवीण श्रीवास्तव, ओम हरि सिंह, संतोष कुमार, नागेश कुमार आदि कर्मी शामिल रहे।

धनघटा में अतिक्रमण से दिक्कत

धनघटा तहसील क्षेत्र के रामजानकी मार्ग पर स्थित बाजार व कस्बे अतिक्रमण की चपेट में हैं। बंडा बाजार, नाथनगर, शनिचरा बाजार, धनघटा, हैंसर बाजार सड़क पर अतिक्रमण से जाम लगता रहता है। इस पर कोई कार्रवाई न किए जाने से आए दिन यातायात प्रभावित हो रहा है।

अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार दिया गया अधिकारियों को निर्देश

अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार आला अधिकारियों ने दिशा-निर्देश भी दिया लेकिन तहसील प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।


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