गोरखपुर, जेएनएन। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में वैसे तो हर वर्ष स्‍कूली विद्यार्थी शोभायात्रा में देश की परंपरा से लोगों को रूबरू कराते हैं। लेकिन इस बार की शोभायात्रा खास थी। संभवत: यह पहला ऐसा अवसर था जब एक साथ दो-दो सीएम इस शोभायात्रा के गवाह बने। यूपी  के सीएम योगी आदित्‍यनाथ और छत्‍तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की मौजूदगी में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई।

योगी ने दी अनुशासन की सीख

उद्घाटन समारोह के दौरान अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों को अनुशासन की सीख दी। उन्होंने कहा कि शोभायात्रा महज प्रदर्शन नहीं है। इसे देखते हुए हर वर्ष जहां इस यात्रा में 25 हजार विद्यार्थी हिस्सा लेते थे, इस बार उनकी संख्या काफी कम कर दी गई है, क्योंकि महत्व इसका नहीं है कि शोभायात्रा में संख्या कितनी हो, महत्व इस बात का है कि संस्थाओं में आंतरिक अनुशासन कितना है। 

 पूर्वांचल के शैक्षिक विकास में शिक्षा परिषद की भूमिका की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 86 वर्ष पूर्व इसकी स्थापना के समय महंत दिग्विजयनाथ के मन-मस्तिष्क में यही भाव रहा होगा कि शिक्षा किसी भी समाज को सम्मान और स्वावलंबन की ओर बढ़ाने और राष्ट्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। योगी ने शिक्षकों से महंत दिग्विजयनाथ की उम्मीदों पर खरा उतरने की अपील की और कहा कि ऐसा करने से ही शिक्षा के सार्थक परिणाम सामने आएंगे।

राष्‍ट्रप्रेम से बढ़कर कुछ नहीं

योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास को मुख्यमंत्री ने देश में स्वाधीनता के यज्ञ की संज्ञा दी, जिस यज्ञ ने नौजवानों में राष्ट्रभक्ति की भावना को पनपाने और राष्ट्र के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देने का कार्य किया। परिषद का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखे जाने की वजह को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि मातृभूमि, धर्म और संस्कृति के प्रति प्रेम की सीख हमें महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व व कृतित्व से मिलती है।

उनका आदर्श, शौर्य और पराक्रम विषम परिस्थितियों में भी बिना धैर्य खोए जीवन के समर में आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। संबोधन में चित्तौड़, मेवाड़, हल्दी घाटी और अरावली की पहाडिय़ों पर महाराणा प्रताप के संघर्ष का जिक्र कर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम का जोश भरने की कोशिश की।

कमियों की पहचान का अवसर

समारोह के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए योगी ने कहा कि यह आयोजन परिषद से जुड़ी संस्थाओं को स्व-मूल्यांकन का अवसर देता है। इसके तहत सप्ताह भर चलने वाली प्रतियोगिता क्षमता, गुणवत्ता और कमियों की पहचान का अवसर देती है। मुख्यमंत्री ने परिषद के संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की कि वह शैक्षिक विकास को लेकर उनकी उम्मीद पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करें। इसी क्रम में उन्होंने परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भोलेंद्र सिंह को भी याद किया, जिनका कुछ दिन पहले निधन हो गया था। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रदेश के खेल व युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान का आभार ज्ञापित भी किया।

नीमा ने किया मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का स्वागत

उद्घाटन करने आए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के सदस्यों ने मंगलवार को स्वागत किया। नीमा के प्रांतीय कोषाध्यक्ष डॉ. जेपी नारायण ने बताया कि डॉ. रमन सिंह नीमा के संरक्षक व विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। इस दौरान डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. दिलीप कुमार त्रिपाठी, डॉ. उषा नारायण, डॉ. अमरनाथ चटर्जी आदि मौजूद रहे।

शिक्षा परिषद के लिए दी गई नई जिम्मेदारी

प्रो. यूपी सिंह अब महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के नए अध्यक्ष होंगे जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेंद्र नाथ वर्मा को परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित हुई परिषद की आवश्यक बैठक में लिया गया। बैठक में परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भोलेंद्र सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी गई।

बैठक में योगी कमलनाथ को सर्वसम्मति से संयुक्त मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई। बैठक सम्पन्न होने के बाद मुख्यमंत्री ने तीन नए पदाधिकारियों को बधाई दी और विश्वास जताया कि इनके नेतृत्व में परिषद नित नए प्रतिमान स्थापित करेगा। प्रो. यूपी सिंह इससे पहले परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर कार्य कर रहे थे। बैठक में प्रो. यूपी सिंह, धर्मेंद्र नाथ वर्मा व कमलनाथ के अलावा प्रमोद कुमार चौधरी, राजेश मोहन सरकार, गोरख प्रताप सिंह,  प्रेमनाथ मिश्र, धर्मेंद्र सिंह, तेज प्रताप शाही, योगी मिथिलेश नाथ, रामजन्म सिंह, रेवती रमण दास, प्रो. हरि जी सिंह, पुष्पदंत जैन, हरिप्रकाश मिश्र, प्रताप नारायण सिंह, विजय प्रताप सिंह, द्वारिका तिवारी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Pradeep Srivastava

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