गोरखपुर, जेएनएन। 305 बेड का जिला अस्पताल फुल हो गया है। इमरजेंसी में आठ स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मरीज को थोड़ी सी राहत मिलती है तो डाक्टर हाथ जोड़कर घर जाने का अनुरोध करते हैं। भर्ती किए बिना कई मरीजों को रोजाना वापस किया जा रहा है। बेड की उपलब्धता न होने के कारण अस्पताल प्रशासन और डाक्टर खुद परेशान हैं। जल्द ही नान कोविड मरीजों के इलाज की दूसरी व्यवस्था न बनाई गई तो जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को दिक्कतें हो सकती हैं।

नान कोविड मरीजों को दूसरे अस्पताल नहीं ले रहे, बढ़ी परेशानी

मेडिकल कालेज, टीबी अस्पताल, रेलवे अस्पताल आदि भर जाने के बाद जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने की शुरुआत हुई थी। कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के बाद भी जिला अस्पताल में अन्य मरीजों का भी इलाज होता रहा। वर्तमान में छह कोरोना संक्रमित और 92 संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

पहले से भर्ती हैं गंभीर मरीज

जिला अस्पताल के बर्न वार्ड, हृदय रोग विभाग, इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानी पीकू, टिटनेस वार्ड में पहले से ही मरीज भर्ती हैं। इन वार्डों में दूसरे मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है।

दूसरे अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करना जरूरी

जिला अस्पताल में बेड हाउसफुल होने के बाद दूसरे अस्पतालों में भी नान कोविड मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था करनी होगी। ऐसा न होने पर मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ज्यादातर नर्सिंग होम नान कोविड मरीजों को पहले से ही भर्ती नहीं कर रहे हैं।

अस्पताल हाउसफुल हो चुका है। स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। फिजिशियन 12-12 घंटे ड्यूटी कर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कर्मचारी भी बहुत मेहनत कर रहे हैं। नान कोविड मरीजों के इलाज में दिक्कत हो रही है। कुछ महत्वपूर्ण वार्डों को बंद भी नहीं किया जा सकता है। - डा. एसी श्रीवास्तव, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल।

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