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अभिभावकों को खरीदने हैं 21 रुपये में मोजे और 100 रुपये में बैग

संतकबीर नगर के 1247 परिषदीय विद्यालयों में 1.49 लाख बच्चे नामांकित हैं। बच्चों का ड्रेस खरीदने के लिए इस बार सीधे अभिभावकों के खाता में धनराशि भेजी जा रही है। प्रति छात्र 1056 रुपये के हिसाब से धनराशि दी जा रही है।

By Rahul SrivastavaEdited By: Published: Fri, 08 Oct 2021 10:30 AM (IST)Updated: Fri, 08 Oct 2021 10:30 AM (IST)
खलीलाबाद प्राइमरी स्कूल में पढ़ते बच्चे। फाइल फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता : संतकबीर नगर जिले के 1247 परिषदीय विद्यालयों में 1.49 लाख बच्चे नामांकित हैं। बच्चों का ड्रेस खरीदने के लिए इस बार सीधे अभिभावकों के खाता में धनराशि भेजी जा रही है। प्रति छात्र 1056 रुपये के हिसाब से धनराशि दी जा रही है। डाइरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए धन खाते में जाएगा, लेकिन समस्या यह है कि दो जोड़ी मोजा के लिए 21 रुपये बच्चे के किताब वाले बैग के लिए मात्र 100 ही मिल रहे हैं।

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इतने पैसे में कैसे मिलेगा सामान

सवाल यह है कि इतने पैसे में गुणवत्तापूर्ण दो सेट ड्रेस, स्वेटर, जूता-मोजा और बैग कैसे मिलेगी। इस लेकर अभिभावकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग पूर्व में बच्चों में निश्शुल्क दो सेट ड्रेस, एक स्वेटर, एक जूता-मोजा व एक बैग देता था। इस बार प्रति जोड़ी 300 रुपये के हिसाब से दो सेट ड्रेस के लिए 600 रुपये, 200 रुपये स्वेटर, 135 रुपये जूता, 21 रुपया मोजा और 100 रुपया बैग के लिए कुल 1056 रुपये दिए जा रहे हैं।

अभिभावकों ने सुनाई समस्या

खलीलाबाद के राजू कुमार ने बताया कि उनके दो बच्चे प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। खाता में पैसा आएगा तो इतने में ड्रेस खरीदना मुश्किल होगा। विनोद कुमार गुप्ता का कहना है कि माडल विद्यालय में कक्षा चार में उनके बच्चे का नामांकन है। पहले तो स्कूल से अच्छा ड्रेस व स्वेटर मिलता था, अब अलग से पैसा लगाना पड़ेगा। भुजैनी के रामसूरत कहते हैं कि उनके घर के दो बच्चे गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़ते हैं। इस बार उनके खाते में बच्चों के ड्रेस का पैसा आने वाला है, लेकिन समस्या यह है कि इतने कम पैसे में होगा क्या। प्रशासन को चाहिए कि वह बच्चों के ड्रेस व अन्य चीजों का अपने स्तर से इंतजाम करे।

शिक्षक सरकार की व्यवस्था से खुश

खलीलाबाद जूनियर हाईस्कूल की प्रधानाध्यापक विजयलक्ष्मी त्रिपाठी का कहना है कि सरकार ने इस बार शिक्षकों को ड्रेस वितरण से मुक्त करके अच्छा निर्णय लिया है। इस बार हर बच्चे के अभिभावक के खाता में पैसा दिया जा रहा है। शिक्षक पढ़ाई पर विशेष ध्यान दे पाएंगे। शिक्षक अमरेश चौधरी का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुपालन में कार्य किया जा रहा है। ड्रेस और स्वेटर बांटने से मुक्ति मिलने से सभी शिक्षकों में खुशी है।

अभिभावकों के बैंक खाते में ड्रेस खरीदने के लिए भेजा जा रहा पैसा

प्रभारी बीएसए गिरीश कुमार सिंह ने कहा कि परिषदीय विद्यालय में नामांकित बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में इस बार ड्रेस खरीदने के लिए पैसा भेजा रहा है। शिक्षकों को इस बार ड्रेस वितरण की व्यवस्था से मुक्त किया गया है। अभिभावकों को ड्रेस खरीदने के लिए शासन से बजट निर्धारित किया गया है।


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