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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गोरखपुर में खेती ही कर पाएंगे अवैध कालोनियों में प्लाट लेने वाले, 49 पर चल चुका है बुलडोजर, इन 27 कालोनियों के ध्वस्तीकरण का आदेश हो चुका है जारी

Published: Wed, 06 Mar 2024 09:31 AM (IST)Updated: Wed, 06 Mar 2024 09:33 AM (IST)

जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने कहा कि अधिकांश अवैध कालोनियों का भू-प्रयोग कृषि है और ये प्राधिकरण की विस्तारित क्षेत्र ...और पढ़ें

जीडीए ने अब तक 100 अवैध कालोनियां की हैं चिह्नित
जीडीए ने अब तक 100 अवैध कालोनियां की हैं चिह्नित

 अरुण चन्द, गोरखपुर। अवैध कालोनियों में प्लाट लेने वाले ज्यादातर लोग फंस चुके हैं। अब वे जमीन पर किसी तरह का निर्माण तो नहीं ही करा सकेंगे। धीरे-धीरे अवैध कालोनियों के नाम सार्वजनिक हो जाने से प्लाट के दोबारा बिकने की संभावना खत्म होती जा रही है। अब इन प्लाट का प्रयोग खेती-बागवानी या डेयरी आदि संचालित करने के ही काम में आ सकेगा।

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से दिसंबर, 2022 से लेकर अब तक करीब 15 महीनों में 100 अवैध कालोनियां चिह्नित की जा चुकी हैं। इनमें से 49 अवैध कालोनियों पर प्राधिकरण का बुलडोजर चल चुका है। जबकि, 27 कालोनियों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हो चुका है। कार्रवाई की जानी बाकी है।

इसी तरह 24 कालोनियों को लेकर सुनवाई चल रही है। प्राधिकरण का दावा है कि इनमें भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी तय है। जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के मुताबिक अब तक जो भी अवैध कालोनियां चिन्हित की गई हैं, उनमें करीब 90 प्रतिशत कालोनियों का भू-प्रयोग कृषि है।

नई महायोजना 2031 में भी इनमें से भी 75 प्रतिशत कालोनियों के भू-प्रयोग में बदलाव की कोई आशा नहीं है। महज 20 प्रतिशत कालोनियों का ही भू-प्रयोग कृषि से आवासीय हो सकता है। नई महायोजना आने के बाद यह आंकड़े भी पूरी तरह साफ हो जाएंगे।

महायोजना लागू होने के बाद जिन अवैध कालोनियों का भू-प्रयोग आवासीय होता है उनके कालोनाइजर को कंपाउंडिंग कराने के साथ ही ले-आउट स्वीकृत कराना होगा। तभी वे अपने प्लाट में किसी तरह का निर्माण करा सकेंगे अन्यथा कृषि भू प्रयोग होने की वजह से मानचित्र नहीं स्वीकृत हो सकेगा। ऐसे में इन कालोनियों में प्लाट लेकर फंसे लोग सिर्फ खेती-बागवानी के तौर पर ही अपनी जमीन का प्रयोग कर सकेंगे।

इन कालोनियों को ध्वस्त किया जाना है

अनंत सिटी, रिस्ता इन्क्लेव जंगल कौड़िया, प्रभुत्त नगर सेमर डाढ़ी, आयुष गोल्फ सिटी विशुनपुर, क्लासिक ग्रीन सिटी, डालफिन ग्रीन सिटी विशुनपुर, तिरूपति ग्लेक्सी विशुनपुर, संस सिटी जंगल कौड़िया, सर्वोदय कालोनी प्रेम नगर, एसबीडी जंगल कौड़िया, तालजहदा/गायघाट, बहरामपुर, माडापार, माड़ापार रामचंद्र नगर, कोनी, ताल कंदला ग्राम सेमरी, जंगल रामगढ़ उर्फ चौरी, भैंसहा गांव, बहरामपुर, देवीपुर एजीएल पैराडाइज, सुंदर विहार, जंगल सिकरी, ताल नदौर वाराणसी रोड, मोतीराम अड्डा, रामनगर करजहां अभिषेकपुरम।

इन कालोनियों के मामले में चल रही सुनवाई

नरूद्दीन चक आराजी, रेड हील ताल जामुआर जंगल कौड़िया, जंगल कौड़िया बाईपास रोड, शेरपुर चमराहे, मौजा सुभाष अली, श्री नारायण बिल्डर्स एवं कालोनाइजर्स बुढ़िया माई नगर, बुढ़िया माई ग्रीन गार्डेन रूदलापुर, रामपुरम कालोनी, अंबे सिटी जंगल धूसड़, गुलरिहा, बिछिया, आयुष स्मार्ट सिटी सोनबरसा, सिद्धि विनायक नगर सोनबरसा, माड़ापार, जंगल मेहताब, माडापार कटेहरी टोला, आराजी बसडीला और जंगल मेहताब राव, रामनगर करजहां खोराबार।

जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने कहा कि अधिकांश अवैध कालोनियों का भू-प्रयोग कृषि है और ये प्राधिकरण की विस्तारित क्षेत्र की हैं। नई महायोजना 2031 में भी इनका भू-प्रयोग बदलने की उम्मीद बहुत कम है। आगे की महायोजना में ही कोई उम्मीद बन सकेगी। तब तक इन कालोनियों के प्लाट पर किसी तरह का पक्का निर्माण नहीं कराया जा सकता। लोगों से अपील है कि वे किसी भी कालोनी में प्लाट खरीदने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसका भू प्रयोग क्या है। प्राधिकरण से ले-आउट या रेरा में कालोनी का पंजीकरण है या नहीं।

भू-प्रयोग बदला तो भी राह आसान नहीं

अवैध कालोनियां बसाने वाले ज्यादातर बिचौलिए हैं। यानी प्लाटिंग कर कालोनी उन्होंने भले ही बसाई, लेकिन रजिस्ट्री मूल काश्तकार से ही कराया है। दूसरे यह कि ले-आउट के लिए कालोनी की कुल भूमि का 40 प्रतिशत सड़क, नाली आदि के लिए सुरक्षित करना होगा तभी प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत होगा। कई कालोनियों के ज्यादातर प्लाट बिक चुके हैं, जिससे मौके पर उतनी जमीन ही नहीं बची रह गई है।