बाढ़ में बह गई किताबें और स्कूल ड्रेस, नेपाल के जैक्सन की आंखों में तैर रहा सिर्फ एक सवाल
नेपाल में त्रिशूली नदी की बाढ़ से 12 वर्षीय जैक्सन श्रेष्ठ की किताबें और स्कूल ड्रेस बह गई है, जिससे उसकी पढ़ाई अधर में लटक गई है।

HighLights
जैक्सन की किताबें और स्कूल ड्रेस बाढ़ में बही।
स्कूल में कमर तक कीचड़ जमा, पढ़ाई बाधित।
हजारों बच्चों की शिक्षा पर बाढ़ का गहरा असर।
विश्वदीपक त्रिपाठी, बैरेनी (नेपाल)। हाथ में कीचड़ से सनी परिवार की तस्वीर और आंखों में आंसू। 12 साल का जैक्सन श्रेष्ठ कभी उस तस्वीर को देखता है तो कभी अपने घर की ओर। पिता मलबा हटा रहे हैं, लेकिन जैक्सन की चिंता घर से ज्यादा अपनी कापी-किताबों की है। उसकी दो स्कूल ड्रेस बह चुकी हैं, किताबें कीचड़ में दब गई हैं और जिस स्कूल में वह पढ़ता था, वहां अब कमर तक सिल्ट जमा है। उसके सामने एक ही सवाल है, अब वह स्कूल कैसे जाएगा।
नेपाल के जैक्सन की पूरी कहानी
कक्षा सात में पढ़ने वाला जैक्सन बैरेनी के सक्सेज स्कूल का छात्र है। 26 अगस्त की सुबह आई त्रिशूली की बाढ़ उसके लिए स्कूल की छुट्टी भर नहीं लेकर आई, उसकी पढ़ाई की पूरी दुनिया ही छीन ले गई।
वह धीरे से कहता है, मेरी सबसे प्रिय विज्ञान की किताब भी नहीं बची। उसमें मैंने कई चित्र बनाए थे। अब उसके पन्ने कीचड़ से सन चुके हैं। बुआ (पापा) बता रहे थे स्कूल में ब्लैकबोर्ड और बेंच भी नहीं बचे। इमारत में कमर तक कीचड़ है। जिस मैदान में वह दोस्तों के साथ खेलता था, वहां भी लेदो (गाद) भरा है।
जैक्सन को अपनी किताबों के साथ दोस्तों की चिंता भी सताती है। कहता है उनकी भी कोई खबर नहीं है। वे सुरक्षित हैं या नहीं। बात करते-करते उसकी आवाज धीमी पड़ जाती है। आंखों से आंसू निकल आते हैं। सामने उसका घर है, जहां पिता राजकुमार श्रेष्ठ फावड़े से सिल्ट निकाल रहे हैं।

मां लक्ष्मी श्रेष्ठ रसोई में दबे बर्तन तलाश रही हैं। जैक्सन जानता है कि घर फिर बनाना होगा, लेकिन उसके सामने उससे भी बड़ा सवाल है कि स्कूल की किताबें और ड्रेस कौन देगा और पढ़ाई कब शुरू होगी।
बैरेनी बाजार में करीब 100 घर तबाह हुए हैं। इस तबाही के बीच जैक्सन की उम्र के हजारों बच्चे भी अपनी पढ़ाई को लेकर इसी तरह असमंजस में हैं। शिक्षण संस्थानों को दोबारा खड़ा करने के साथ बच्चों को किताबें, ड्रेस और पढ़ने का माहौल लौटाना भी चुनौती है।

जैक्सन के पिता राजकुमार श्रेष्ठ छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का घर बना पाए थे। वह कहते हैं, सब खत्म हो गया। अब बच्चे की पढ़ाई कैसे होगी, समझ नहीं आ रहा। सरकार से मदद का इंतजार है।
त्रिशूली का पानी उतरने लगा है, लेकिन जैक्सन के मन में एक सवाल अब भी अटका है- मैं फिर कब पढ़ पाऊंगा। यह सवाल अकेले जैक्सन का नहीं है। बाढ़ से प्रभावित हजारों बच्चों की पढ़ाई अब इसी एक सवाल पर टिकी है।
