नेपाल की आस्था अडिग, भोटेकोशी बाढ़ के बाद भी महादेव पर भरोसा, संकट में आस्था बन रही सहारा
भोटेकोशी बाढ़ से नेपाल में गहरा संकट आया है, लेकिन अपनों को खोने के बावजूद नेपाली जनता की आस्था महादेव और गोरखनाथ में अटूट है।
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HighLights
भोटेकोशी बाढ़ से नेपाल में गहरा संकट, पर आस्था अडिग।
महादेव और गोरखनाथ में नेपाली जनता का अटूट विश्वास कायम।
पशुपतिनाथ से मुक्तिनाथ तक धार्मिक स्थल संकट में सहारा।
जितेन्द्र पाण्डेय, सिद्धार्थनगर। हिमालय की गोद में बसे नेपाल के लिए आपदाएं नई नहीं हैं। भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन ने कई बार इस देवभूमि को झकझोरा, लेकिन हर तबाही के बाद जिंदगी फिर उठ खड़ी हुई।
रसुवा में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल को गहरे संकट में डाल दिया है। अपनों के लापता होने का दर्द है, घर-परिवार उजड़ने की चिंता है, मगर इसी पीड़ा के बीच आस्था का भरोसा अडिग है-महादेव की धरती है, वही सब सहेजेंगे।
नेपाल की धार्मिक चेतना में बाबा गोरखनाथ की विशेष जगह है। नाथ परंपरा में गोरखनाथ को भगवान शिव के स्वरूप अथवा उनके योग-परंपरा के महान सिद्ध के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है।
गोरखा से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार नेपाल के राजा पृथ्वीनारायण शाह की मुलाकात भी बाबा गोरखनाथ से हुई थी। बाबा ने उन्हें दही दिया, जिसे ग्रहण करने में संकोच के कारण वह उनके पैरों पर गिर गया। लोकमान्यता है कि इससे बाबा अप्रसन्न हुए और उन्होंने शाह वंश के शासन के सीमित पीढ़ियों तक रहने की भविष्यवाणी की।
अलग-अलग कथाओं में इस प्रसंग का विवरण भिन्न मिलता है। इसके बाद शाह वंश ने नेपाल पर लंबे समय तक शासन किया। एक जून 2001 का राजमहल हत्याकांड राजशाही के इतिहास का भयावह अध्याय बना। राजा बीरेंद्र और राजपरिवार के कई सदस्यों की हत्या हुई।
तत्कालीन युवराज दीपेंद्र को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। वर्ष 2008 में नेपाल गणराज्य बना और राजशाही समाप्त हो गई। लोकविश्वास में कुछ लोग इन घटनाओं को गोरखनाथ की कथित भविष्यवाणी से जोड़ते हैं, हालांकि इसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
नेपाल की लोकस्मृति में ‘सती ले सर्पेको देश’, यानी सती द्वारा शापित भूमि, की कथा भी प्रचलित है। यह मल्लकालीन काजी भीम मल्ल और उनकी पत्नी भुवनलक्ष्मी से जुड़ी है। मान्यता है कि भीम मल्ल की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने राज्य को शाप दिया।
यह भी लोककथा है, लेकिन समय के साथ नेपाल की कठिनाइयों का रूपक बन गई। इन कथाओं से कहीं बड़ी नेपाल की आस्था है। वर्ष 2015 का गोरखा भूकंप इसका उदाहरण है। करीब नौ हजार लोगों की जान लेने वाली उस त्रासदी में काठमांडू सहित बड़ा क्षेत्र मलबे में बदल गया था।
मंदिर और घर ढहे, परिवार बिछड़े, मगर नेपाल ने फिर खुद को खड़ा किया। 1988 का उदयपुर भूकंप, 1993 की बाढ़-भूस्खलन, 2017 की तराई बाढ़ और 2023 का जाजरकोट भूकंप भी इसी संघर्ष के गवाह हैं। नेपाल में शिव आस्था की जड़ें बेहद गहरी हैं।
काठमांडू में पशुपतिनाथ, मुस्तांग में मुक्तिनाथ, रौतहट में प्रभुनाथ और कपिलवस्तु में शिवगढ़ी जैसे धाम संकट में भरोसे के केंद्र हैं। गोरखा का गोरखनाथ इसी आस्था परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी है।
महादेव और गोरखनाथ के प्रति यह श्रद्धा नेपाली जनमानस में शिव को योग, तप और संरक्षण के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है। मान्यता है कि हिमालय भगवान शिव का घर है। इसलिए आपदा के बीच भी नेपाली मन महादेव की शरण में सांत्वना तलाशता है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार जुलाई 2026 में 71775 विदेशी पर्यटक नेपाल पहुंचे। इनमें 23490 भारतीय थे। जनवरी से जुलाई तक 693,379 विदेशी पर्यटक नेपाल पहुंच चुके थे। पशुपतिनाथ से मुक्तिनाथ तक धार्मिक पर्यटन नेपाल की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज भोटेकोशी की बाढ़ ने फिर नेपाल को गहरा जख्म दिया है।
परिवार अपनों की तलाश में हैं, कई घरों में मातम है और भविष्य अनिश्चित है। फिर भी आस्था नहीं टूटी। गोरखनाथ की लोकमान्यता हो, ‘सती ले सर्पेको देश’ की कथा हो या 2015 की तबाही- नेपाल ने हर दौर देखा और खुद को संभाला है। इसलिए आज भी नेपाली मन यही कह रहा है-यह देवभूमि है, पशुपतिनाथ की छाया है, गोरखनाथ की परंपरा है और महादेव का आशीष है। यह संकट भी गुजरेगा और महादेव फिर सब सहेज देंगे।
इन्होंने कहा...
नेपाल में विपदा बड़ी है। पहाड़ों में महादेव शिव का वास माना जाता है। हमें विश्वास है कि संकट कितना भी बड़ा हो, भगवान शिव की कृपा से नेपाल फिर संभलेगा और सब ठीक होगा।
-फूलसिंह क्षेत्री, भैरहवा
नेपाल में आई विपदा से पर्यटन प्रभावित हुआ है, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं रहेगी। नेपाल महादेव शिव की धरती है, उनकी कृपा से जल्द हालात सामान्य होंगे और पर्यटक फिर लौटेंगे।
-धर्मराज विश्वकर्मा, व्यापारी, चनरौटा
-मुक्तिनाथ, पशुपतिनाथ, प्रभुनाथ और शिवगढ़ी जैसे धाम नेपाल की धार्मिक पहचान हैं। यहां के पहाड़ों में भगवान शिव का वास माना जाता है। संकट में यही आस्था लोगों को हिम्मत देती है।
-मनमोहन चौधरी, निवर्तमान अध्यक्ष, लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका
नेपाल महादेव शिव की पवित्र धरती है। इस विपदा में दुनिया भर के लोग नेपाल के साथ खड़े हैं। हमें विश्वास है कि शिव की कृपा और लोगों के सहयोग से देश फिर संभलेगा।
-राजेश ज्ञावली, लुम्बिनी
