सिद्धार्थनगर, जागरण संवाददाता। सिद्धार्थनगर जिले के माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय में रोज 30 से 35 ऐसे रागी पहुंच रहे हैं, जिनकी आंखें मोबाइल और लैपटाप के प्रयोग से सूख रही हैं। ऐसे में सावधानी बहुत जरूरी है। चश्में का नियमित प्रयोग से ही आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है।

मोबाइल का अधिक इस्तेमाल है खतरनाक

लोग अपनी सुविधा के लिए मोबाइल व लैपटाप का प्रयोग कर रहे हैं। जरूरत से अधिक मोबाइल पर गेम, वीडियो या फिल्म देखना भी खतरनाक साबित हो रहा है। हर दिन लगातार मोबाइल के घंटों प्रयोग से लोगों की आंखें सूखने लगी हैं। माेबाइल से निकलने वाला विकिरण बच्चों की आंख के लिए खतरनाक साबित हो रही है। लगातार मोबाइल स्क्रीन पर एकटक देखने से आंखों की पलक झपकने की संख्या भी घट रही है।

एकटक मोबाइल देखने से आंखों में धुंधलापन की शिकायत

सामान्य तौर पर लोगों पलक झपकने की दर प्रति मिनट 15 से 16 होती है। मोबाइल स्क्रीन पर लगातार बने रहने से यह घटकर छह से सात के निम्न स्तर पर पहुंच जाता है। इससे बच्चों का विजन भी कमजोर हो जाता है। एकटक मोबाइल देखने से आंखों में धुंधलापन की भी शिकायत आ रही है। धुंधलापन आने से कुछ दिन में आंखों की रोशनी भी कम हो जाती है। करीब 40 प्रतिशत बच्चों में ड्राइनेस की समस्या देखने को मिल रही रही है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. राकेश वर्मा का कहना है कि इंटरनेट मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण भी युवाओं का एंड्राइड मोबाइल के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है। हालांकि ड्राइनेस की समस्या फिलहाल विकराल नहीं हुई है। लेकिन जिस गति से मोबाइल का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। उससे आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। स्क्रीन पर बने रहने से आंखें अब अधिक प्रभावित हो रही हैं। आंखों की रोशनी बचाने के लिए पलकों को नियमित झपकें, स्क्रीन के बिना काम न हो पाने की दशा में चश्में का प्रयोग अवश्य करें। गाजर, मूली, टमाटर और पालक का सेवन नियमित करते रहें।

Edited By: Pragati Chand