संतकबीर नगर : पिछले डेढ़ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने में कई शिक्षक बर्खास्त हुए। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर परिषदीय विद्यालयों में तैनात रहे जनपद के 13 शिक्षकों की नौकरी नियुक्ति तिथि से समाप्त हुई। इनमें से सात शिक्षकों से करीब एक करोड़ रुपये की वसूली होनी है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई। इसके साथ ही छह बर्खास्त शिक्षकों की अभी तक रिपोर्ट ही तैयार नहीं हो पाई है। इसे लेकर भी सवाल है। बर्खास्त शिक्षकों से अभी तक वसूली न होना विभागीय मिलीभगत का परिणाम है।

बघौली ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय जंगल खुर्द में फर्जी अभिलेख पर नौकरी करने वाला ध्रुवचंद्र सिंह बर्खास्त हुआ था। वह 2009-10 में सिद्धार्थनगर जिले में तैनात था। इसके बाद 2016 से वह जिले में आया था। उसने दोनों जिलों में 4645199 रुपये वेतन प्राप्त किया, जबकि नाथनगर ब्लाक के छह फर्जी शिक्षकों ने वेतन आदि के मद में आहरित करीब 53 लाख 64 हजार 279 रुपये प्राप्त किया है। यह सभी शिक्षक फर्जी अभिलेखों पर नौकरी लिए थे। जांच होने पर बर्खास्त हो गए। उसके बाद से ही सभी गायब हैं। विभाग के कुछ जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत के चलते मामला दब गया है। इन फर्जी शिक्षकों से होनी है वसूली

बघौली ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय जंगलखुर्द में तैनात रहा ध्रुवचंद्र सिंह से 46 लाख 45 हजार 199 रुपये की वसूली करनी है। नाथनगर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय रैनिया के रणजीत सिंह से 43 लाख 81 हजार 814 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगाराजा सिदाही के श्रेयांश पुरवार से दो लाख 56 हजार 493 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालय गणेशपुर के राधेश्याम यादव से एक लाख 56 हजार 493 रुपये व विनायक कुमार त्रिपाठी से एक लाख 56 हजार 493 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालय बारीडीहा के अविनाश कुमार पांडेय से एक लाख 56 हजार 493 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालय गौरा के राममोहन शुक्ल से एक लाख 56 हजार 493 रुपये की वसूली होनी है।

बीएसए दिनेश कुमार ने बताया कि कूटरचित अभिलेख के सहारे शिक्षक की नौकरी पाने व जांच में पकड़े जाने पर संबंधित की बर्खास्तगी की गई। नियुक्ति तिथि से बर्खास्तगी तक आहरित वेतन की रिकवरी की रिपोर्ट तैयार है। प्रशासन से सात के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई चल रही है। शेष छह बर्खास्त शिक्षकों द्वारा आहरित वेतन का विवरण अभी तैयार नहीं हो पाया है। इसके साथ ही कुछ और शिक्षकों के अभिलेखों की जांच जारी है। डेढ़ वर्ष बाद भी शिक्षकों से वसूली क्यों नहीं हुई, इसकी भी जांच की जाएगी।

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