गोरखपुर, जागरण संवाददाता। मनीष हत्याकांड में अंतिम हत्यारोपित दारोगा विजय यादव की गिरफ्तारी को लेकर प्रयागराज व जौनपुर में टीमों ने डेरा डाल दिया है। टीमें दोनों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पांच हत्यारोपितों की गिरफ्तारी से पुलिस थोड़ी राहत में है। इसका नतीजा है कि गोरखपुर की चार टीमें लौट आई हैं। शेष टीमें हत्यारोपितों की गिरफ्तारी में जुटी हैं।

लगाई गई हैं कानपुर व गोरखपुर पुलिस की 16 टीमें

मनीष हत्याकांड में हत्यारोपितों की गिरफ्तारी के लिए कानपुर के अलावा गोरखपुर की आठ टीमें लगाई गई थीं। पांच हत्यारोपितों की गिरफ्तारी के बाद चार टीमें गोरखपुर में लौट आईं। चारों टीमें प्रयागराज व जौनपुर में जमी हुई हैं। टीमों की कोशिश है कि किसी भी हाल में दारोगा विजय यादव न्यायालय में आत्मसमर्पण न कर सके और न ही उन्हें कोर्ट से स्टे मिल सके।

हाईकोर्ट पहुंचा हत्‍यारोपित दारोगा

चर्चा यह भी दारोगा विजय यादव अरेस्ट स्टे के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दे चुका है, लेकिन अवकाश के चलते सुनवाई नहीं हो सकी है। उसे किसी ने आश्वस्त किया है कि 18 अक्टूबर को न्यायालय खुलते उसके मामले की सुनवाई हो जाएगी और उसे अरेस्ट स्टे मिल जाएगा। विजय यादव को अरेस्ट स्टे मिलने के बाद अन्य आरोपित पुलिस कर्मी भी उसी आधार पर अपने बचाव का प्रयास करेंगे।

पुलिस पर दारोगा को छूट देने की आशंका

चर्चा यह है कि इसे संज्ञान में लेते हुए पुलिस कर्मियों ने हत्यारोपित दारोगा को छूट दी है। ऐसे में यदि 18 अक्टूबर को काम नहीं हुआ तो वह गंभीरता से आरोपित की गिरफ्तारी के लिए लगेंगे। सूत्रों का यह भी कहना है कि विजय ने खुद टीमों को आश्वस्त किया है कि 18 अक्टूबर को अरेस्ट स्टे नहीं मिलने पर वह खुद आकर अपनी गिरफ्तारी दे देगा।

हुआ यह था 

कानपुर के व्‍यवसायी मनीष गुप्‍त दो दोस्‍तों के साथ गोरखपुर घूमने आए थे। रातमगढ इालके में होटल कृष्‍णा पैलेसे में रुके थे। 27 सितंबर की रात रामगढ ताल पुलिस ने होटल में तलाशी की थी। मनीष के कमरे की तलाशी के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में रामगढ ताल थाने के तत्‍कालीन इंस्‍पेक्‍टर जगत नारायण सिंह और फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र सहित सात पुलिस वालों पर मुकदमा दर्ज है। पांच आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। एक अन्‍य दारोगा फरार है।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi