'चलो मालती, घर चलें...', गोरखपुर में 40 साल बाद भी उस एक आवाज की आस में मालती मिश्रा
70 वर्षीय मालती मिश्रा, जिन्हें 40 साल पहले संतान न होने पर पति ने छोड़ दिया था, अब गोरखपुर के ...और पढ़ें

नेहरू अस्पताल के बेड पर भर्ती मालती मिश्रा। जागरण
HighLights
70 वर्षीय मालती मिश्रा 40 साल से घर वापसी को तरस रही हैं।
संतान न होने पर पति ने छोड़ा, अब वृद्धाश्रम से अस्पताल में।
गोरखपुर में उपचार के दौरान परिवार से घर लौटने की आस।
गजाधर द्विवेदी, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के नेहरू अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में बिस्तर पर लेटी 70 वर्षीय मालती मिश्रा की आंखें कोई भी आहट होने पर दरवाजे पर टिक जाती हैं। कोई आता दिखाई देता है तो उन्हें लगता है शायद अपने होंगे। जब उनके कदम आगे बढ़ जाते हैं तो वह चुपचाप फिर लेट जाती हैं। जिंदगी के करीब चार दशक पहले छूटे एक रिश्ते को वह आज भी अपने मन से नहीं निकाल पाई हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उनके पास शिकायतों की लंबी फेहरिस्त नहीं, बस एक छोटी सी इच्छा है- घर लौटना है।
मालती के अनुसार, करीब 40 वर्ष पहले उनकी शादी गोपालगंज, बिहार में हुई थी। शादी के चार वर्ष बाद भी संतान नहीं हुई तो पति ने उन्हें छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली। मालती के जीवन का एक सहारा उसी दिन उनसे छिन गया। इसके बाद पिता और भाई ने उन्हें अपने साथ रखा। देवरिया में उन्होंने परिवार के बीच रहकर काफी जीवन गुजारा।
उन्हें उम्मीद थी कि अपनों का साथ उम्रभर रहेगा, लेकिन समय किसी के लिए नहीं रुकता। करीब पांच वर्ष पहले पिता का निधन हो गया। घर में बचा एकमात्र सहारा भाई थे। उम्र बढ़ी तो भाई भी मालती की देखभाल करने में असमर्थ होने लगे। धीरे-धीरे वह उस उम्र में पहुंच गईं, जब किसी अपने के सहारे की सबसे अधिक जरूरत होती है, लेकिन उनके पास अपना कहने के लिए कुछ भी नहीं था।
मई 2026 में देवजी वृद्धाश्रम के अशोक श्रीवास्तव ने मालती को अपने संरक्षण में लिया। करीब डेढ़ महीने बाद वह पुष्पलता सिंह के मातृ आंचल सेवा संस्थान पहुंचीं। यहां से उनकी जिंदगी को एक और सहारा मिला। आंखों की सर्जरी के लिए उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद 18 सितंबर को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बीआरडी मेडिकल कालेज लाया गया।
अब अस्पताल में चिकित्सक उनका उपचार कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ उनकी देखभाल कर रहा है और अस्पताल से उन्हें भोजन भी मिल रहा है। उपचार से उनकी हालत में सुधार हो रहा है। अस्पताल की व्यवस्था उन्हें फिलहाल संभाले हुए है, लेकिन मन की बेचैनी किसी दवा से शांत नहीं हो रही।
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मालती ने घर फोन भी कराया। उधर से कोई उन्हें लेने नहीं आया। जिस घर से चार दशक पहले उनका रिश्ता टूट गया था, आज उसी घर की चौखट पर लौटने की इच्छा उनके भीतर फिर जाग उठी है। मालती के लिए घर अब सिर्फ एक पता नहीं है। वह उनके जीवन के उस हिस्से का नाम है, जिसे उन्होंने कभी पूरी तरह छोड़ा ही नहीं।
चार दशक की दूरी के बावजूद उनके मन में पति या परिवार के प्रति कोई कटुता नहीं दिखती। वह बस इतना चाहती हैं कि जिंदगी की इस शाम में कोई अपना उन्हें पहचान ले, हाथ थाम ले और कह दे- 'चलो मालती, अब घर चलते हैं।'
मालती मिश्रा का उच्च रक्तचाप बहुत ज्यादा था। कुछ लोग उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर चले गए। उनका समुचित उपचार किया जा रहा है। हालत में सुधार है। उन्हें चाय, बिस्किट, दूध, भोजन, दवा आदि जरूरतें पूरी की जा रही हैं। उनके स्वजन को सूचना दे दी गई है, क्योंकि ठीक होने के बाद अस्पताल में किसी मरीज को रखने की व्यवस्था नहीं है।
