गोरखपुर, जागरण संवाददाता। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ में नेपाल के राजपरिवार की गहरी आस्था है। हर साल मकर संक्रांति पर राज परिवार की ओर से खिचड़ी आती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। राजपरिवार की आस्था का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि करीब 30 साल पूर्व वहां के राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव व महारानी ऐश्वर्या स्वयं खिचड़ी चढ़ाने आई थीं। उन्होंने महायोगी की पूजा-अर्चना कर आस्था की खिचड़ी चढ़ाई थी। हर साल राजपरिवार के पुरोहित खिचड़ी लेकर आते हैं और यहां से रोट का महाप्रसाद नेपाल राजपरिवार को भेजा जाता है।

गुरु गोरक्षनाथ की कृपा से एक हुआ था नेपाल

माना जाता है कि गुरु गोरक्षनाथ की कृपा से पृथ्वी नारायण शाह ने बाइसी व चौबीसी नाम से बंटीं 46 रियासतों को मिलाकर नेपाल राज्य की स्थापना की थी। महाराज पृथ्वी नारायण शाह के समय से ही गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई जो आज तक चली आ रही है। मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि नेपाल राजपरिवार की गुरु गोरक्षनाथ में अपार श्रद्धा है। जब तक वहां राजा का शासन था, उस समय की नेपाल की मुद्रा व मुकुट पर गुरु गोरक्षनाथ का नाम अंकित है।

कल चढ़ेगी गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी

द्वारिका तिवारी ने बताया कि 15 जनवरी को मंदिर में गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाई जाएगी। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह लगभग तीन बजे सबसे पहले मंदिर की और उसके बाद नेपाल राजपरिवार की खिचड़ी चढ़ाएंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।

मास्क लगाकर आना अनिवार्य

कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने खिचड़ी चढ़ाने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मास्क अनिवार्य किया है। जिन श्रद्धालुओं के पास मास्क नहीं होगा, उन्हें मंदिर प्रशासन की तरफ से मास्क उपलब्ध कराया जाएगा। महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।

ऐसे बनता है रोट महाप्रसाद

गोरखनाथ मंदिर के पुजारी योगी कमल नाथ ने बताया कि गेहूं के आटे में काली मिर्च, सौंफ व चीनी मिलाकर गूंथा जाता है। मुट्ठी से लंबाई में गाेल बनाकर उसे देशी घी में तला जाता है। इसके बाद उसे कूटा जाता है। कूटने के बाद यह मनभोग जैसा दिखता है। इसे रोट महाप्रसाद कहा जाता है।

Edited By: Pradeep Srivastava